एमपी में 48 लाख परिवारों को मिलेगा वैध मालिकाना हक, तहसीलदार, नायब तहसीलदार भी कर सकेंगे जमीन की रजिस्ट्री

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने गांवों में आबादी वाली जमीन पर बरसों से रह रहे 48 लाख से अधिक परिवारों को उनकी प्रॉपर्टी का कानूनी मालिकाना हक देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी सब-रजिस्ट्रार (उप-पंजीयक) के अधिकार दे दिए गए हैं। इससे अब पात्र ग्रामीण नागरिकों की जमीनों की रजिस्ट्री स्थानीय स्तर पर ही बहुत आसानी से हो सकेगी।

स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ

सरकार ने ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ शुरू की है, जिसके तहत लाभार्थियों को रजिस्ट्री कराने के लिए कोई स्टॉम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं देना होगा। यही नहीं, रजिस्ट्री पर लगने वाला पंचायत उपकर भी पूरी तरह माफ रहेगा और इसकी भरपाई राज्य सरकार खुद पंचायतों को करेगी। इस लोक-कल्याणकारी योजना के कारण मध्य प्रदेश सरकार पर करीब 3,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आएगा, लेकिन ग्रामीणों को इसका पूरा लाभ मिलेगा।

तहसील स्तर पर होगी रजिस्ट्री की सुविधा

नए नियमों के आने के बाद अब ग्रामीणों को रजिस्ट्री कराने के लिए उप-पंजीयक दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। वे सीधे अपने तहसील कार्यालय में पदस्थ राजस्व अधिकारियों के पास जाकर यह काम करवा सकेंगे। राज्य में पहले से काम कर रहे 235 सब-रजिस्ट्रार के अलावा अब ये राजस्व अधिकारी भी रजिस्ट्री करने की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया बेहद आसान, पारदर्शी और तेज हो जाएगी।

बैंक से लोन लेना होगा आसान

सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि जिन लोगों के स्वामित्व कार्ड (जमीन के कागज) बन चुके हैं, उनकी रजिस्ट्री कराकर उन्हें बैंकों से लोन लेने के काबिल बनाया जा सके। कानूनी रूप से रजिस्ट्री होने के बाद ग्रामीण अपनी जमीन पर नया घर बनाने, व्यापार शुरू करने या खेती-किसानी के काम को बढ़ाने के लिए बैंकों से आसानी से लोन ले सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा।

निगरानी समिति और प्रचार के लिए बजट

योजना को ठीक ढंग से लागू करने और इसकी कड़ी निगरानी के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अगुवाई में एक विशेष समिति बनाई जाएगी। इस समिति में राजस्व, पंचायत और ग्रामीण विकास जैसे कई अहम विभागों के बड़े अधिकारी शामिल रहेंगे। इसके साथ ही, गांवों के लोगों के बीच इस योजना के प्रति जागरूकता फैलाने और इसके प्रचार-प्रसार के लिए सरकार ने 10 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया है।