देश के चुनिंदा मंदिरों में शामिल यह शिवालय क्यों है इतना खास? शिवलिंग से लेकर प्रतिमा सब अनोखा

सीकर जिले के श्रीमाधोपुर शहर में भगवान शिव का एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है. यह मंदिर शहर के चौपड़ बाजार में स्थित है और चतुर्मुखी शिवालय के नाम से प्रसिद्ध है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, भगवान शिव का यह मंदिर करीब 265 साल पुराना है. उन्होंने बताया कि इस शिवालय का निर्माण श्रीमाधोपुर शहर की स्थापना के समय हुआ था. अपनी प्राचीनता, अनूठी स्थापत्य शैली और दुर्लभ शिव पंचायत के कारण यह मंदिर देशभर में विशेष पहचान रखता है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान शिव पंचायत है. यहां भगवान शिव का चतुर्मुखी शिवलिंग स्थापित है, जिसके चारों ओर भगवान शिव के चार मुख अंकित हैं. इसके अलावा माता पार्वती के साथ माता गौरा की अष्टधातु की प्रतिमा भी विराजमान है. भगवान शिव के साथ दोनों प्रतिमाएं एक साथ बहुत कम मंदिरों में देखने को मिलती हैं. मंदिर में भगवान गणेश और नंदी महाराज भी विराजमान हैं. सावन माह में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. प्रतिदिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
शिव परिवार से अलग विराजमान हैं कार्तिकेय
इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि आमतौर पर शिव परिवार के साथ भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित होती है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है. इस मंदिर में भगवान कार्तिकेय को शिव परिवार से अलग स्थान दिया गया है. उनकी प्रतिमा मंदिर के प्रवेश द्वार पर द्वारपाल के रूप में स्थापित है, जो इस शिवालय को अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है. मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय द्वारपाल के रूप में मंदिर की रक्षा करते हैं.

स्थापना काल का खेजड़ी का पेड़ आज भी सुरक्षित
मंदिर परिसर में मौजूद खेजड़ी का पेड़ भी इस शिवालय को और अधिक खास बनाता है. बताया जाता है कि जहां आज यह मंदिर स्थित है, वहीं पहले एक विशाल खेजड़ी का पेड़ था. मान्यता है कि श्रीमाधोपुर शहर की स्थापना इसी स्थान से हुई थी. यह खेजड़ी का पेड़ आज भी मंदिर परिसर में पूरी तरह सुरक्षित मौजूद है. इसके पास उत्तरमुखी हनुमानजी की प्रतिमा और प्राचीन चतुर्मुखी शिवलिंग स्थापित है. चतुर्मुखी शिवालय केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि श्रीमाधोपुर के इतिहास का भी साक्षी माना जाता है.