नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने वामपंथी विचारधारा और मुस्लिम राजनीति को लेकर एक तीखी टिप्पणी की है। एक टीवी कॉन्क्लेव में शामिल हुए रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रवादी लोग भावनाओं से प्रेरित होते हैं, जबकि वामपंथी अपनी रणनीतियों में अधिक चतुर होते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी हमेशा दिल से बात करते हैं, जबकि वामपंथी अपने दिमाग का उपयोग करके एजेंडा तय करते हैं।
वोट बैंक की राजनीति पर तीखा प्रहार
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल मुसलमानों को केवल एक वोट बैंक के रूप में देखते हैं। इसके विपरीत, उन्होंने भाजपा का पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी पार्टी मुसलमानों को केवल भारत के नागरिक के रूप में मानती है। रिजिजू ने विपक्षी दलों के चरित्र पर सवाल उठाते हुए इसे उनकी राजनीति का एक हिस्सा बताया।
संसद सत्र से पहले विपक्ष की घेराबंदी
मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले विपक्ष एनडीए सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर चुका है। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों को वामपंथी संगठनों का खुला समर्थन मिल रहा है। विपक्षी दल एसआईआर (SIR) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की योजना बना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद कूच के आह्वान और विपक्ष की लामबंदी ने राजनीतिक सरगर्मी को बढ़ा दिया है।
एनआरसी और डेमोग्राफी पर ओवैसी का विरोध
असदुद्दीन ओवैसी, टीएमसी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार एसआईआर के माध्यम से विशेष रूप से एक समुदाय को निशाना बना रही है। ओवैसी का तर्क है कि डेमोग्राफी में बदलाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित आयोग असल में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) की एक पूर्व तैयारी है। विपक्षी दल इसे मुस्लिम विरोधी कदम बताते हुए इसके पुरजोर विरोध की रणनीति अपना रहे हैं।

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