मुंबई। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो की मूल कंपनी एटर्नल के शेयरों में बुधवार को एक बार फिर जबरदस्त रौनक देखने को मिली। करीब 5 महीने के लंबे इंतजार के बाद कंपनी के शेयर एक बार फिर ₹300 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने में कामयाब रहे। बाजार बंद होने के समय हालांकि इसमें थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई, लेकिन इसके बावजूद बीएसई पर यह 2.39 फीसदी की शानदार बढ़त के साथ ₹293.40 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह शेयर 4.76 फीसदी तक दौड़ लगाते हुए ₹300.20 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया था। इससे पहले इसी साल 13 फरवरी 2026 को इस शेयर ने ₹300 का स्तर छुआ था, जिसके बाद से इसमें लगातार उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ था।
नए शेयरहोल्डिंग पैटर्न से मिला बड़ा बूस्ट
एटर्नल के शेयरों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे कंपनी द्वारा जारी जून 2026 तिमाही का नवीनतम शेयरहोल्डिंग पैटर्न है। इस नए डेटा के सामने आते ही निवेशकों का भरोसा कंपनी पर एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। वित्तीय विश्लेषकों और मोतीलाल अल्टरनेट रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए शेयरहोल्डिंग पैटर्न ने वैश्विक बाजारों में कंपनी की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। इसी सकारात्मक रिपोर्ट और भविष्य में बड़े निवेश की संभावनाओं के चलते घरेलू शेयर बाजार में इस स्टॉक को लेकर अचानक खरीदारी का भारी दबाव देखा गया, जिसने शेयर को ऊपरी स्तरों पर धकेल दिया।
विदेशी निवेशकों के लिए खुला निवेश का बड़ा रास्ता
जून तिमाही के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के लिए निवेश योग्य हिस्सेदारी यानी फॉरेन ओनरशिप हेडरूम बढ़कर 25 फीसदी से अधिक हो चुका है। पहले विदेशी हिस्सेदारी सीमित होने के कारण जो तकनीकी अड़चनें आ रही थीं, वे अब पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। मोतीलाल अल्टरनेट रिसर्च के मुताबिक, इस बदलाव के बाद आगामी अगस्त महीने में होने वाले एमएससीआई (MSCI) रिव्यू में एटर्नल को दोबारा से फुल वेटेज दिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इंडेक्स को ट्रैक करने वाले विदेशी फंडों के माध्यम से कंपनी में करीब 52 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम पैसिव इनफ्लो आने का रास्ता साफ हो जाएगा।
वेटेज घटने के बाद वापसी की तैयारी
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध सीमित हिस्सेदारी के चलते वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने एटर्नल के वेटेज को 1.33 फीसदी से घटाकर आधा कर दिया था, जिसके कारण बड़े फंडों की ओर से बिकवाली का दबाव देखा गया था। लेकिन जून तिमाही के ताजातरीन वित्तीय आंकड़ों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी पिछले 9.33 फीसदी के स्तर से काफी आगे निकलकर अब 25 फीसदी से ऊपर जा सकती है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक स्तर पर बड़े फंड हाउस इस भारतीय न्यू-एज टेक कंपनी पर दोबारा बड़ा दांव लगाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
एक साल के उतार-चढ़ाव में निवेशकों की परीक्षा
पिछले एक साल के दौरान इस काउंटर पर निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। बीते साल 16 अक्टूबर 2025 को बीएसई पर इस शेयर ने ₹368.40 का अपना ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जहां से यह लगातार मुनाफावसूली का शिकार होता चला गया। इसके बाद महज पांच महीनों के भीतर यह ऊपरी स्तरों से करीब 42.30 फीसदी टूटकर इसी साल 16 मार्च 2026 को ₹212.55 के अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया था। निचले स्तरों से आई इस शानदार रिकवरी और ₹300 के स्तर को दोबारा हासिल करने से बाजार के जानकारों का मानना है कि शेयर अब अपने सुधारात्मक दौर से बाहर निकल रहा है।

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