मुंबई। पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंचने के कारण भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का तूफान आ गया है। वैश्विक स्तर पर उपजे युद्ध के हालातों से घबराए निवेशकों ने बाजार खुलते ही बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी भरभराकर टूट गए। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये घट गया, जिससे निवेशकों को भारी चपत लगी। जैसे-जैसे कारोबारी सत्र आगे बढ़ा, बाजार का घाटा और गहरा गया, जिसमें सेंसेक्स ने 650 से अधिक अंकों की गोता लगाई और निफ्टी अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया। व्यापक बाजार में भी चौतरफा लाली छाई रही और मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक पूरी तरह रेड जोन में कारोबार करते नजर आए।
ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव से वैश्विक बाजारों में हड़कंप
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर आई खबरों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बन गई है। इस सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान के प्रमुख बंदरगाहों और द्वीपों पर भीषण विस्फोट होने की सूचना है, जिसके जवाब में ईरानी बलों ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलें और घातक ड्रोन दाग दिए हैं। महाशक्तियों के बीच छिड़ी इस सीधी जंग ने वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट को भी बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है।
भू-राजनीतिक संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आया भयंकर उबाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सबसे सीधा और बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहां ईंधन के दाम अचानक उबल पड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगस्त डिलीवरी के लिए अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड दो फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 71.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि सितंबर डिलीवरी वाला ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी करीब दो फीसदी चढ़कर 75.53 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल में आई इस तेजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और दलाल स्ट्रीट की रौनक को पूरी तरह फीका कर दिया है।
बाजार में बढ़ी भारी घबराहट और इंडिया विक्स इंडेक्स में आया उछाल
शेयर बाजार में छाए इस अनिश्चितता के माहौल के बीच बाजार की घबराहट और उतार-चढ़ाव को मापने वाला सूचकांक 'इंडिया विक्स' (India VIX) अचानक तेज छलांग लगाने लगा। इस सूचकांक में आई बड़ी तेजी इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार के भीतर वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव का दौर बेहद तीव्र रह सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब भी वैश्विक मोर्चों पर अनिश्चितता बढ़ती है, तब इंडिया विक्स का ग्राफ ऊपर जाता है, जो निवेशकों को बाजार में कोई भी नया और बड़ा जोखिम लेने से पूरी तरह रोकता है।
सरकारी बैंकों और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में देखी गई सबसे बड़ी गिरावट
इस महाबिकवाली के दौर में घरेलू बाजार को सबसे बड़ा नुकसान सरकारी बैंकों और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों से पहुंचा है। इन दोनों ही प्रमुख सेक्टर्स के निफ्टी इंडेक्स एक-एक फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुए, जिसने पूरे बाजार को नीचे धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई। बैंकिंग और ऑटो शेयर्स में आई इस भारी गिरावट के चलते रिकवरी के सारे प्रयास पूरी तरह विफल साबित हुए और बाजार के प्रमुख सूचकांक दिन के निचले स्तरों के आसपास ही संघर्ष करते नजर आए।

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