दोहा: होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) के पास कतर के एक विशाल एलएनजी टैंकर जहाज 'अल रकियात' पर संदिग्ध ड्रोन से हमला होने की गंभीर खबर सामने आई है। यह जहाज कतर के रास लफ्फान बंदरगाह से भारत में गुजरात के दहेज बंदरगाह की ओर जा रहा था, तभी ओमान की खाड़ी और अरब सागर के मिलन बिंदु के पास इस वारदात को अंजाम दिया गया। इस हमले के बाद कतर सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है और सीधे तौर पर ईरान के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
कतर ने जताई कड़ी आपत्ति और हमले की निंदा की
इस सुरक्षा चूक और हमले पर कतर के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। कतर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर इस तरह एक कमर्शियल टैंकर को निशाना बनाया जाना बेहद निंदनीय और चिंताजनक है। कतर ने इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन (नेविगेशन) सुरक्षा कानूनों का एक गंभीर और स्पष्ट उल्लंघन माना है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि इस तरह की हिंसक हरकतों से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था (ग्लोबल एनर्जी सप्लाई) के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
ईरानी उप-राजदूत को तलब कर सौंपा विरोध पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए कतर के विदेश मंत्रालय ने कतर में तैनात ईरान के उप-राजदूत मोहसेन मोहम्मद घनेई को मुख्यालय में तलब किया। यहाँ प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन यूसुफ ने उन्हें एक औपचारिक विरोध पत्र सौंपा। कतर ने ईरानी राजनयिक के सामने दो टूक शब्दों में कहा कि वे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली तमाम गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाएं। कतर ने ईरान से मांग की है कि वह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और समुद्री जहाजों की सुरक्षा को दांव पर लगाने जैसी हरकतों से पूरी तरह दूरी बनाए रखे।
कतर उठाएगा अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम
इस पूरी घटना के बाद कतर ने दुनिया के सामने अपनी स्थिति साफ कर दी है कि वह मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। उसने स्पष्ट किया है कि अपनी संपत्तियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर कोई भी उचित कदम उठाने के अपने अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा। कतर ने इस ड्रोन हमले को लेकर ईरान से तुरंत स्पष्टीकरण देने को कहा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी तरह पालन करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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