जमीन खरीद-फरोख्त मामले में बढ़ीं मुश्किलें, DRO जोगिंद्र शर्मा से होगी गहन पूछताछ

पंचकूला। हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए जिला राजस्व अधिकारी (DRO) जोगिंद्र शर्मा को रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को कड़े सुरक्षा घेरे में जिला अदालत के समक्ष पेश किया गया। जहाँ जांच एजेंसी ने घोटाले की परतों को खोलने और छिपाई गई बेहिसाब संपत्ति का पता लगाने के लिए आरोपी की 8 दिनों की पुलिस हिरासत (रिमांड) मांगी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील दीपांशु बंसल की लंबी और तीखी दलीलों के बाद, अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात आरोपी डीआरओ को 7 दिनों के पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश जारी किया।

दिल्ली, मनाली और भिवानी में छिपाई गई है रिश्वत की काली कमाई

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला जिले में हुए एक बड़े जमीन खरीद-फरोख्त घोटाले और भूमि अधिग्रहण के बदले मोटी रकम ऐंठने से जुड़ा हुआ है। एसीबी की प्राथमिक जांच और तकनीकी विश्लेषण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस जमीन घोटाले के एवज में आरोपी अधिकारी जोगिंद्र शर्मा के हिस्से में करीब 2.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी आई थी। इस काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए आरोपी ने बेहद शातिर तरीका अपनाया। जांच टीम को इनपुट मिले हैं कि यह पूरी रकम हरियाणा से बाहर दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के मनाली और हरियाणा के ही भिवानी जिले में अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर छिपाकर रखी गई है।

रिमांड के दौरान होगी पैसों की रिकवरी और सहयोगियों पर शिकंजा

अदालत द्वारा मंजूर किए गए इस 7 दिवसीय रिमांड के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एक विशेष टीम आरोपी जोगिंद्र शर्मा को लेकर दिल्ली, मनाली और भिवानी स्थित उन संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी करेगी, जहां नकदी छिपाए जाने की बात सामने आई है। एसीबी के सूत्रों का कहना है कि इस रिमांड अवधि के दौरान न केवल इस 2.40 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत बरामदगी की जाएगी, बल्कि इस पूरे सिंडिकेट में शामिल राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों, बिचौलियों और बड़े प्रॉपर्टी डीलरों के नामों का भी खुलासा कराया जाएगा।

अदालत में चली लंबी बहस, बचाव पक्ष ने रिमांड का किया विरोध

सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में वकीलों और मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ जमा थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने अदालत के सामने दलील दी कि जांच एजेंसी द्वारा मांगी गई 8 दिनों की रिमांड बहुत ज्यादा है और उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने स्वास्थ्य और अन्य तकनीकी आधारों पर रिमांड की अवधि कम करने की पुरजोर मांग की। दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने दलील दी कि यह एक बहुत बड़ा संस्थागत भ्रष्टाचार है, जिसमें सरकारी खजाने और आम जनता के पैसों का बड़े पैमाने पर गबन हुआ है। पैसों की बरामदगी और साजिश के मुख्य सूत्रधारों तक पहुंचने के लिए आरोपी से गहन पूछताछ बेहद जरूरी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने 7 दिन की पुलिस हिरासत को तर्कसंगत माना।

जांच के दायरे में कई और रसूखदार, बड़े खुलासे की उम्मीद

एसीबी के उच्चाधिकारियों के मुताबिक, यह घोटाला केवल एक जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य महत्वपूर्ण जमीनों के अधिग्रहण और उनके मुआवजे के वितरण में की गई हेराफेरी भी शामिल हो सकती है। आगामी कुछ दिनों में इस मामले में कई अन्य रसूखदार चेहरों और विभागीय कर्मचारियों पर भी कानून का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। ब्यूरो इस बात की भी डायरी खंगाल रहा है कि क्या पूर्व में भी इस तरह के लेन-देन को अंजाम दिया गया था। फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से ही जिले के राजस्व विभाग में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।