बीजिंग। मध्य चीन का हुबेई प्रांत इन दिनों प्रकृति के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है। क्षेत्र में आए विनाशकारी आंधी-तूफान ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। चीनी सरकारी मीडिया द्वारा जारी ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक कम से कम आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश के कई अन्य हिस्सों में भी मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे अनुमानित रूप से लगभग 20 करोड़ की विशाल आबादी के प्रभावित होने की आशंका है।
हुबेई प्रांत में तूफान के बाद हाहाकार
हुबेई प्रांत में आए इस तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि इसने अपने रास्ते में आने वाली कई संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के कारण सैकड़ों पेड़ जड़ से उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कई रिहायशी मकानों की छतें उड़ गईं। तूफान के बाद हुए हादसों और मलबे की चपेट में आने से आठ लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रशासनिक टीमें और राहत कर्मी मलबे को हटाने तथा प्रभावितों तक मदद पहुंचाने के काम में जुटे हुए हैं।
20 करोड़ की आबादी पर बाढ़ और मूसलाधार बारिश का साया
चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (NMC) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में देश के मध्य, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो सकती है। यांग्त्ज़ी नदी और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है, जिससे मैदानी इलाकों में भीषण बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, यदि बारिश का यह सिलसिला थमा नहीं, तो देश के कई घने बसे प्रांतों की करीब 20 करोड़ आबादी सीधे तौर पर इस आपदा की जद में आ सकती है, जिससे फसलों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू किया बड़े पैमाने पर रेस्क्यू
संभावित खतरे को देखते हुए चीनी सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। निचले और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों और अस्थाई राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका के चलते यातायात को रोक दिया गया है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों का लगातार पालन करते रहें।

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