गाज़ियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में अवैध रूप से भ्रूण का लिंग परीक्षण करने और गर्भपात कराने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान एक निजी अस्पताल के संचालक समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपी बेहद शातिर तरीके से कार के भीतर पोर्टेबल मशीन रखकर घूम-घूमकर लिंग जांच के काले धंधे को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने इन्हें महामाया स्टेडियम के पास से उस वक्त दबोचा जब वे एक ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। इनके पास से चीन में बनी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, एक कार, 20 हजार रुपये नगद और अन्य चिकित्सीय सामान बरामद हुआ है। पकड़े गए आरोपियों में बागपत का संदीप, बुलंदशहर का तस्लीम, गढ़मुक्तेश्वर का सलमान और सिहानी का साहिद शामिल हैं। मुख्य आरोपी संदीप लोनी में साईं अस्पताल चलाता है और वह पहले भी जनवरी 2025 में इसी जुर्म में जेल जा चुका है।
कमीशन का खेल और अवैध पैकेज की दरें
पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह भ्रूण लिंग जांच के लिए 15 से 20 हजार रुपये वसूलता था, जबकि लिंग जांच के साथ गर्भपात कराने का पूरा पैकेज 50 से 60 हजार रुपये का होता था। इस नेटवर्क को चलाने के लिए उन्होंने अस्पतालों के बाहर दलाल तैनात कर रखे थे, जो गर्भवती महिलाओं के परिजनों को फंसाते थे। प्रत्येक सफल ग्राहक लाने पर इन दलालों को ढाई से तीन हजार रुपये और गर्भपात कराने पर 10 हजार रुपये तक का मोटा कमीशन दिया जाता था। इस गिरोह के तार केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए थे, जहां से महिलाएं जांच कराने यहां आती थीं।
नेपाल के रास्ते चीन निर्मित मशीन की तस्करी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पकड़ी गई पोर्टेबल मशीन को अवैध रूप से नेपाल के रास्ते भारत लाया गया था। जहां मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली वैध मशीनों की कीमत 5 से 25 लाख रुपये तक होती है, वहीं चीन में बनी यह तस्करी वाली पोर्टेबल मशीन आरोपियों को महज दो से तीन लाख रुपये में मिल गई थी। पुलिस अब इस मशीन की सप्लाई चेन और इसके मुख्य तस्करों की तलाश में जुटी है। इसके साथ ही, ग्रामीण स्तर पर गर्भवतियों की सटीक जानकारी जुटाने के लिए क्या इस गिरोह को आशा कार्यकर्ताओं से मदद मिल रही थी, इस बिंदु पर भी गहनता से तफ्तीश की जा रही है।
छह साल से सक्रिय नेटवर्क और पूर्व की कार्रवाइयां
शुरुआती जांच से पता चला है कि यह गिरोह पिछले छह सालों से लगातार सक्रिय है और अब तक 200 से अधिक महिलाओं की अवैध जांच कर चुका है। स्वास्थ्य विभाग पिछले कुछ समय से ऐसे तत्वों पर लगातार शिकंजा कस रहा है, जिसके तहत एक साल में 36 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अदालती कार्रवाई की गई है और नियमों के उल्लंघन पर नौ केंद्रों के लाइसेंस निलंबित हुए हैं। जिले में बीते तीन वर्षों के दौरान लगातार ऐसी छापेमारी की गई है, जिसमें मई 2023, दिसंबर 2024, मई 2025 और हाल ही में मार्च व जून 2026 में भी कई अवैध टेक्नीशियन और संचालकों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

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