नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को एक नया आयाम देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की अपनी पहली ऐतिहासिक आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे को लेकर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने अपनी गहरी खुशी और उत्साह जाहिर किया है। पीएम लक्सन ने स्पष्ट किया कि वैश्विक पटल पर भारत की भूमिका अद्वितीय है और न्यूजीलैंड की भविष्य की आर्थिक समृद्धि के लिए भारत सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार देशों में से एक बन चुका है।
दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के ठीक दो महीने बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में ले जाने का काम करेगी।
पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने 'एक्स' पर जाहिर की खुशी
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इस दौरे की आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, "मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद गर्व और खुशी हो रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। न्यूजीलैंड की आर्थिक स्थिरता और समृद्धि के लिए भारत के साथ हमारे संबंध बेहद अहम हैं।"
'मुक्त व्यापार समझौते' से खुलेंगे समृद्धि के नए द्वार
प्रधानमंत्री लक्सन ने भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की सराहना करते हुए कहा कि अप्रैल में दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के जरिए हम अपने द्विपक्षीय रिश्तों को एक ऐतिहासिक स्तर पर ले जा रहे हैं।
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रोजगार और निर्यात में वृद्धि: इस समझौते से न्यूजीलैंड के भीतर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे, हमारा अंतरराष्ट्रीय निर्यात बढ़ेगा और देश का आर्थिक ढांचा मजबूत होगा।
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1.4 अरब का विशाल भारतीय बाजार: यह समझौता न्यूजीलैंड की वस्तुओं और सेवाओं के लिए 1.4 अरब की आबादी वाले विशाल भारतीय बाजार के द्वार खोल देगा। इससे न्यूजीलैंड के स्थानीय समुदायों और उत्पादकों के पास अधिक राजस्व आएगा, जिससे लोगों की व्यक्तिगत आय में भी बड़ा इजाफा होगा।
10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे पीएम मोदी
राजनयिक प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जुलाई को न्यूजीलैंड के प्रमुख शहर ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को अपनी व्यस्त व्यस्तताओं के बाद वहां से रवाना होंगे।
उल्लेखनीय है कि भारत और न्यूजीलैंड ने 16 मार्च 2025 को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी। दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों और व्यापार मंत्रालयों ने दिन-रात काम करके रिकॉर्ड 9 महीनों के भीतर इस पूरी जटिल वार्ता को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, जो वैश्विक व्यापार के इतिहास में अब तक का सबसे तेजी से पूरा होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (Fastest FTA) बन गया है।
इस ऐतिहासिक समझौते के मुख्य बिंदु और फायदे
इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से दोनों देशों को कई बड़े आर्थिक लाभ मिलने जा रहे हैं:
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100% शुल्क की समाप्ति: इस एफटीए के तहत न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाले शत-प्रतिशत (100%) सीमा शुल्क (टैर्िफ) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इससे भारतीय कपड़ा, रत्न, आभूषण और आईटी सेवाओं को ओशिनिया और प्रशांत द्वीप के बाजारों में एक बड़ा प्रवेश द्वार (गेटवे) मिल जाएगा।
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$20 बिलियन का महा-निवेश: वैश्विक आर्थिक संबंधों को दीर्घकालिक मजबूती देने के लिए न्यूजीलैंड आने वाले समय में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 20 अरब डॉलर) का भारी-भरकम निवेश करेगा।
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कृषि और बागवानी में तकनीकी सहयोग: न्यूजीलैंड ने भारत के भीतर कीवी फल, सेब और शहद के स्थानीय उत्पादकों की कार्यक्षमता, फसल की गुणवत्ता और क्षेत्रीय क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए विशेष कार्य योजनाओं पर सहमति जताई है। इसके साथ ही भारत में न्यूजीलैंड के चुनिंदा कृषि उत्पादों (जैसे मनुका शहद, सेब और एल्ब्यूमिन) के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। दोनों देश बागवानी, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वाइन (शराब) क्षेत्र में भी तकनीकी आदान-प्रदान करेंगे।
मजबूत जन-संबंध और व्यापारिक आंकड़े
भारत और न्यूजीलैंड की यह अटूट साझेदारी मजबूत आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बने गहरे जन-संबंधों (People-to-People ties) पर टिकी है। वर्तमान में न्यूजीलैंड, ओशिनिया क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में न्यूजीलैंड का कुल वैश्विक आयात 47 बिलियन अमेरिकी डॉलर और निर्यात 42 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा था। न्यूजीलैंड अपनी कुल जीडीपी का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा हर साल विदेशी बाजारों में निवेश करता है, जिसके लिए अब भारत उसका सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। पीएम मोदी की इस यात्रा से इस निवेश में और तेजी आने की उम्मीद है।

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