बीजिंग: चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले हफ्ते एक गगनचुंबी इमारत से छोटे विमान के टकराने की भीषण दुर्घटना के मामले में जांच कर रहे अधिकारियों ने एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला खुलासा किया है। आधिकारिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस भयानक हादसे के पीछे कोई तकनीकी खराबी या मौसम की खराबी नहीं थी, बल्कि विमान उड़ा रहा पायलट खुद लंबे समय से गंभीर मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा और घबराहट की बीमारी से जूझ रहा था। जांच टीम को पायलट के पास से एक डायरी मिली है, जिससे साफ पता चलता है कि वह काफी समय से अपनी जान देने (आत्महत्या) के विचार से घिरा हुआ था। इस खौफनाक हादसे में खुद पायलट की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इमारत में मौजूद 13 अन्य लोग मलबे और कांच की चपेट में आने से घायल हुए थे।
100 से ज्यादा मंजिला 'चाइना जून' टावर से हुई थी टक्कर
बीजिंग के चाओयांग जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक की गई विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, यह दिल दहला देने वाला हादसा 26 जून को घटित हुआ था। दो सीटों वाले एक छोटे 'ऑरोरा एसए60एल' विमान ने बीजिंग के बाहरी इलाके पिंगगू के एक हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद यह नियंत्रित क्षेत्र से बाहर निकलकर सीधे बीजिंग के सबसे व्यस्त व्यावसायिक और वीआईपी इलाके में घुस गया। इसके बाद विमान सीधे सरकारी कंपनी सीआईटीआईसी (CITIC) ग्रुप के मुख्यालय से जा टकराया, जिसे 'चाइना जून' भी कहा जाता है। 528 मीटर ऊंची और 100 से ज्यादा मंजिलों वाली यह गगनचुंबी इमारत बीजिंग की सबसे ऊंची बिल्डिंग है। विमान के टकराते ही इमारत का भारी मलबा नीचे सड़कों और पार्क में गिरा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि समय रहते रेस्क्यू टीम ने बिल्डिंग में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे घायलों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी।
कौन था पायलट और कैसे बना यह आत्मघाती कदम?
पायलट की पृष्ठभूमि: जांच में मृत पायलट की पहचान 66 वर्षीय बुजुर्ग लियू के रूप में हुई है, जो बीजिंग का ही मूल निवासी था। अधिकारियों के मुताबिक, लियू का अपनी पत्नी से तलाक हो चुका था और वह घर में बिल्कुल अकेला रहता था। उसने अपनी इस अकेलेपन की जिंदगी के बीच साल 2021 में स्पोर्ट पायलट लाइसेंस और हाल ही में साल 2024 में प्राइवेट पायलट लाइसेंस हासिल किया था। हादसे वाले दिन उसने पहले एक सह-पायलट (असिस्टेंट) के साथ ट्रेनिंग उड़ान भरी थी। इसके बाद वह दोबारा अकेले विमान लेकर रनवे से उड़ा, लेकिन हवा में जाते ही उसने हवाई अड्डे के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से अपना संपर्क तोड़ लिया और विमान का रुख शहर की सबसे ऊंची इमारत की तरफ मोड़ दिया।
चीन की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस हादसे ने बीजिंग की बेहद सख्त और हाइटेक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है, जिससे चीनी प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। जिस चाओयांग जिले के व्यावसायिक क्षेत्र में यह विमान क्रैश हुआ, वह चीन के शीर्ष कम्युनिस्ट नेताओं के आधिकारिक निवास स्थान और 'ग्रेट हॉल ऑफ पीपल' जैसी अति-संवेदनशील इमारतों से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है।
बीजिंग में किसी भी तरह के छोटे या हल्के विमान को उड़ाने के लिए देश की वायु सेना और नागरिक उड्डयन प्रशासन से कई स्तरों की कड़ी मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके बावजूद एक मानसिक रूप से बीमार पायलट इतने संवेदनशील नो-फ्लाई ज़ोन में विमान लेकर कैसे दाखिल हो गया, इसका जवाब रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। घटना के बाद चीन के इंटरनेट सेंसर बोर्ड ने सोशल मीडिया से हादसे से जुड़ी तमाम तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट को तुरंत डिलीट करवा दिया है।
पूरे देश में फ्लाइट ट्रेनिंग और मनोरंजन उड़ानों पर रोक
इस गंभीर सुरक्षा चूक के बाद चीनी सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए पूरे देश में संचालित होने वाले सभी प्राइवेट फ्लाइट स्कूलों और एविएशन ट्रेनिंग सेंटर्स को अपनी उड़ानें तुरंत रोकने और नए सिरे से कड़े सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, चीन में बिना विशेष अनुमति के किसी भी तरह की मनोरंजन उड़ानों, हॉट एयर बलून और ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। प्रशासन ने इस पूरे मामले को तकनीकी दुर्घटना मानने के बजाय 'व्यक्तिगत कारणों से सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालने' का आपराधिक मामला घोषित किया है।

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