भारत-जापान रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी और ताकाइची की अहम बैठक

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर जापान की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में जापानी प्रधानमंत्री का भव्य और औपचारिक स्वागत किया गया, जहां उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' (Guard of Honor) दिया गया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने खुद उनकी अगवानी की और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, पीएम ताकाइची का यह दौरा भारत और जापान के बीच 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

हैदराबाद हाउस में शिखर सम्मेलन, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

जापानी प्रधानमंत्री इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी के साथ '15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन' (15th India-Japan Annual Summit) में हिस्सा लेंगी। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में होने वाली इस उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक में कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। इस वार्ता का मुख्य एजेंडा निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित रहेगा:

  • आर्थिक सुरक्षा (Economic Security): वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर।

  • ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में नए समझौतों पर विमर्श।

  • रणनीतिक सहयोग: वर्तमान अस्थिर अंतरराष्ट्रीय और भू-राजनीतिक हालातों को देखते हुए दोनों देशों के रक्षा व कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करना।

पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए समर्पित इकलौता देश

विदेश मंत्रालय ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर जापान एकमात्र ऐसा देश है, जिसके साथ भारत ने अपने पूर्वोत्तर राज्यों (North-East Region) के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास के लिए एक विशेष संस्थागत तंत्र—'भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम' (India-Japan Act East Forum) का गठन किया है। इस मंच के जरिए पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, जलविद्युत और अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को गति दी जा रही है।

'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' और क्वाड (QUAD) पर विमर्श

भारत रवाना होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री ताकाइची ने इस द्विपक्षीय यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदार का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में शांति और स्थिरता का एक मुख्य स्तंभ बताया।

शिखर वार्ता के दौरान दोनों नेता 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' (FOIP) यानी मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में साझा प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे। इसके साथ ही, चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव के बीच 'क्वाड' (QUAD) ढांचे—जिसमें जापान, भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं—के तहत रणनीतिक और व्यावहारिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।