कुरुक्षेत्र:हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में बच्चों के स्वास्थ्य और उनके सर्वांगीण विकास को लेकर एक बेहद सराहनीय कदम उठाया गया है। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले नौनिहालों को कुपोषण के चंगुल से बाहर निकालने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक विशेष और नई कार्ययोजना तैयार की है। इस अनूठी पहल के अंतर्गत अब बच्चों को दिए जाने वाले नियमित पोषण आहार के अलावा विशेष रूप से पारंपरिक और सेहतमंद खाद्य पदार्थ भी परोसे जाएंगे, ताकि उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी को तेजी से पूरा किया जा सके।
पारंपरिक खानपान से सुधरेगी बच्चों की सेहत
विभाग ने बच्चों को अतिरिक्त ऊर्जा और ताकत देने के लिए स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों को इस अभियान का हिस्सा बनाया है। अब जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नियमित रूप से चूरमा और उबले हुए काले चने खाने के लिए दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का देसी और शुद्ध खानपान बच्चों को भरपूर मात्रा में प्रोटीन, आयरन और अन्य आवश्यक विटामिन्स प्रदान करेगा, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास को एक नई गति मिलेगी।
सर्वेक्षण में सामने आए कुपोषण के चिंताजनक आंकड़े
इस नई मुहिम को शुरू करने की मुख्य वजह हाल ही में विभाग द्वारा जिला स्तर पर कराया गया एक व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण है। इस सर्वे की रिपोर्ट में कुरुक्षेत्र जिले के भीतर कुल 1950 बच्चे कुपोषण का शिकार पाए गए हैं, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद ही विभाग ने तुरंत हरकत में आते हुए बच्चों के डाइट चार्ट में बड़े बदलाव करने का फैसला किया ताकि जमीनी स्तर पर सुधार लाया जा सके।
गंभीर श्रेणियों में बंटे हैं प्रभावित बच्चे
सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट पर नजर डालें तो कुपोषित पाए गए बच्चों को उनकी शारीरिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में चिन्हित किया गया है। इनमें से 93 बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण यानी सैम (SAM) की श्रेणी में पाए गए हैं, जिन्हें तत्काल और विशेष चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत है। इसके अलावा 1556 बच्चे मध्यम तीव्र कुपोषण यानी मैम (MAM) से ग्रसित मिले हैं, जबकि 301 बच्चे ऐसे हैं जो अपनी उम्र के लिहाज से बेहद कम वजन और गंभीर रूप से बौनेपन की समस्या से जूझ रहे हैं।
बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग पर रहेगा विशेष जोर
इस योजना को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए विभाग केवल भोजन वितरण तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों की सेहत में होने वाले सुधारों की लगातार निगरानी भी की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन चिन्हित बच्चों के वजन और लंबाई का हर महीने सटीक रिकॉर्ड रखें। इसके साथ ही बच्चों के माता-पिता को भी घर पर बेहतर साफ-सफाई और सही खानपान के प्रति जागरूक किया जाएगा ताकि कुपोषण के खिलाफ इस जंग को पूरी तरह जीता जा सके।

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