अगर आप शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष से परेशान हैं, तो मुजफ्फरपुर के गुदरी रोड पर स्थित करीब 120 साल पुराना शनिदेव मंदिर आपके लिए आस्था का बड़ा केंद्र हो सकता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से पूजा करने और शनिदेव को तेल, काला तिल, काला कपड़ा और खास तौर पर काला छाता चढ़ाने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि हर शनिवार और अमावस्या को यहाँ भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।
120 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
मंदिर के मुख्य पुजारी राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना उनके परदादा चुन्नी लाल शर्मा ने लगभग 120 साल पहले की थी। पहले यह एक छोटा सा मंदिर था, लेकिन भक्तों की बढ़ती आस्था के कारण आज इसने एक बड़े और भव्य मंदिर का रूप ले लिया है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहाँ शालिग्राम पत्थर से बनी शनिदेव की अद्भुत प्रतिमा है, जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
जानिए कब खुलते हैं मंदिर के पट
पुजारी के मुताबिक, मंदिर सुबह खुलने के बाद दोपहर 12 बजे तक आम भक्तों के लिए खुला रहता है। इसके बाद दोपहर में पट बंद हो जाते हैं और शाम को 4 बजे दोबारा खुलते हैं, जो रात 11 बजे तक खुले रहते हैं। हर शनिवार और अमावस्या के दिन यहाँ विशेष पूजा, भव्य आरती और दीपदान का आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने दूर-दूर से लोग आते हैं।
काला छाता चढ़ाने की है अनोखी परंपरा
वैसे तो भक्त यहाँ शनिदेव को काला तिल, सरसों का तेल, लोहे की कील और काले कपड़े चढ़ाते हैं, लेकिन यहाँ काला छाता चढ़ाने की एक अनोखी परंपरा है। माना जाता है कि जो भी भक्त भगवान को काला छाता भेंट करता है, उसके सिर पर हमेशा ईश्वर का आशीर्वाद बना रहता है, घर में सुख-शांति आती है और शनिदेव के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।
कलयुग के न्यायाधीश हैं शनिदेव
स्थानीय निवासी संजय रजक का कहना है कि शनिदेव को कलयुग का न्यायाधीश यानी न्याय करने वाला देवता माना जाता है। यहाँ जो भी व्यक्ति साफ दिल से आता है, उसे उसके अच्छे कर्मों का फल जरूर मिलता है। इसी गहरी आस्था के कारण अब सिर्फ मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और दूसरे राज्यों से भी लोग अपनी परेशानियां दूर करने इस मंदिर में आते हैं।

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