दरवाजा तोड़कर निकाली गई जूनियर डॉक्टर की बॉडी, सुसाइड नोट में लिखा- ‘अलविदा दुनिया’

वाराणसी: आईएमएस बीएचयू के सुश्रुत हॉस्टल में रह रहे 26 वर्षीय जूनियर डॉक्टर ऋत्विक कुंदू ने ड्रिप के माध्यम से कोई संदिग्ध दवा लेकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। रविवार की रात जब सुरक्षाकर्मियों को इस बात का अंदेशा हुआ, तो उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हॉस्टल के कमरे का दरवाजा तोड़ा और डॉक्टर के शव को बाहर निकाला। कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें एक युवती का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि वह उनसे बेहद प्यार करती थी।

मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली के रहने वाले डॉ. ऋत्विक एनेस्थीसिया विभाग में जूनियर रेसिडेंट थे। शनिवार दोपहर से जब वे अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, तो उनके साथी डॉक्टरों ने उनकी तलाश शुरू की। जब वे हॉस्टल के कमरा नंबर 361 पर पहुंचे, तो कमरा अंदर से बंद मिला। इसके बाद साथियों ने फौरन हॉस्टल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी।

विश्वविद्यालय प्रशासन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा, तो डॉक्टर बिस्तर पर बेसुध पड़े थे और उनके हाथ में ड्रिप लगी हुई थी। प्रशासन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने ड्रिप के जरिए खुद को दवा दी थी। हालांकि, उन्होंने किस सॉल्ट या दवा का इस्तेमाल किया, इसकी जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, एनेस्थीसिया की अत्यधिक खुराक जानलेवा साबित हो सकती है।

परिजनों को दी गई सूचना, जांच में जुटी पुलिस

जूनियर डॉक्टर ने इतना आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसके सही कारणों का पता लगाया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने घटना की जानकारी डॉक्टर के परिवार को दे दी है और शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया गया है। थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि पुलिस मामले से जुड़े हर पहलू को खंगाल रही है और बरामद सुसाइड नोट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सुसाइड नोट: 'मम्मी-पापा मुझे माफ करना…'

डॉक्टर ऋत्विक ने अपने आखिरी खत में लिखा:

"मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना, मैं आपकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पा रहा हूं। जिंदगी बहुत छोटी है। बाहर से सब कुछ बहुत अच्छा दिख रहा था, लेकिन यहाँ आने के बाद अहसास हुआ कि संघर्ष बहुत ज्यादा है। मैं अपनी मर्जी से यह कदम उठा रहा हूं, इसलिए मेरे जाने के बाद किसी को भी परेशान न किया जाए। खासकर उस लड़की को, जो मुझसे बहुत प्यार करती है और जिसने मेरे लिए बहुत कुछ किया है। सभी दोस्तों और परिवारवालों… अब मैं जा रहा हूँ। अलविदा दुनिया।"

यदि आप या आपके जानने वाले किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव या कठिन दौर से गुजर रहे हैं, तो कृपया किसी विशेषज्ञ या मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन से संपर्क करें। सहायता हमेशा उपलब्ध है।