सोनीपत। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर देश की प्रथम पर्यावरण-अनुकूल हरित हाइड्रोजन ट्रेन के नियमित संचालन की संभावनाएं काफी प्रबल हो गई हैं। पुरानी दिल्ली से सोनीपत रेल खंड पर शुक्रवार को इस अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीक से निर्मित ट्रेन का अंतिम चरण का अति-उच्च गति (हाई-स्पीड) परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। दोपहर से लेकर देर शाम तक चले इस सघन अभियान के दौरान ट्रेन ने गति सीमा को बढ़ाते हुए 85 किलोमीटर से लेकर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। दिल्ली स्थित उत्तर रेलवे मुख्यालय के प्रधान मुख्य अभियंता (प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर) की सीधी निगरानी में वरिष्ठ रेल अधिकारियों और विशेषज्ञ तकनीकी विंग ने ट्रेन की इलेक्ट्रिकल वायरिंग, व्हील बैलेंसिंग, आधुनिक सिग्नल प्रणाली और आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम जैसे अत्यंत कड़े सुरक्षा मानकों की गहनता से जांच की। प्रातः काल 9:10 बजे इस ट्रेन को जींद जंक्शन से दो डीजल इंजनों की सहायता से 75 किमी/घंटा की नियंत्रित गति से दिल्ली ले जाया गया था, जिसके उपरांत दोपहर 12 बजे के बाद इस रैक ने सोनीपत के लिए अपना मुख्य ख्याल रन आरंभ किया। दोपहर 1:25 बजे सोनीपत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 3 पर आगमन के बाद ट्रेन को लगभग 29 मिनट के लिए रोका गया ताकि वंदे भारत एक्सप्रेस सहित तीन अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता (क्लियरेंस) दिया जा सके और इसके पश्चात ट्रेन ने अप-डाउन ट्रैक पर देर शाम तक कुल चार फेरे लगाए।
चार चरणों में गति का सफल परीक्षण और विवरण
इस अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों को परखने के लिए रेलवे बोर्ड के निर्देश पर इसकी गति को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया था। पहले दौर के परीक्षण में ट्रेन को 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ाया गया, जबकि दूसरे राउंड में इसकी स्पीड बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गई। इसके बाद तीसरे चरण के ट्रायल में ट्रेन ने 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति छुई और अंततः चौथे व अंतिम राउंड में इसे 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अति-उच्च गति पर सफलतापूर्वक परखा गया। ज्ञात हो कि भारतीय रेल प्रशासन इस महत्वाकांक्षी और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए पिछले 4 महीनों से निरंतर कड़ा अभ्यास और विभिन्न प्रकार के तकनीकी ट्रायल आयोजित कर रहा है।
तकनीकी विंग की हरी झंडी और बुनियादी ढांचे की समीक्षा
रेलवे के आंतरिक सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस लंबी अवधि के परीक्षणों के बाद ट्रेन के इंजन, ईंधन सेल (फ्यूल सेल) और आंतरिक यांत्रिक प्रणालियों से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं को पूरी तरह से दुरुस्त और त्रुटिहीन कर लिया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश में प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है, जिसके लिए जींद और सोनीपत के बीच विशेष बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। तकनीकी विंग ने अपनी अंतिम समीक्षा रिपोर्ट में इस ट्रेन को यात्री सेवाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और उपयुक्त पाया है।
नियमित परिचालन की तैयारी और हरी झंडी का इंतजार
इस अंतिम और सफल हाई-स्पीड ट्रायल के संपन्न होने के साथ ही सोनीपत-जींद रेल खंड के दैनिक यात्रियों का लंबा इंतजार अब समाप्त होने की कगार पर है। रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस ऐतिहासिक ट्रेन सेवा को नियमित रूप से शुरू करने के लिए आगामी कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक समय मांगा जाएगा। जैसे ही प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से तिथि निर्धारित कर दी जाएगी, वैसे ही देश की इस पहली पर्यावरण-अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेन को एक भव्य समारोह में हरी झंडी दिखाकर वाणिज्यिक परिचालन के लिए रवाना कर दिया जाएगा।

More Stories
असम सरकार का बड़ा फैसला, छोटे चाय उत्पादकों को किसान आईडी से मिलेगी नई पहचान
सबरीमाला सोना गायब मामले में बड़ा अपडेट, जांच एजेंसियों ने तेज की कार्रवाई
Amarnath Yatra Security: LoC पार कर भारत में घुसा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार, एजेंसियां सतर्क