नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस पार्टी अब सार्वजनिक मंचों पर अपनी आधिकारिक नीति से अलग राय रखने वाले नेताओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद शशि थरूर के कुछ बयानों पर कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने यह साफ संकेत दिया है कि संगठन के भीतर अनुशासन और विचारधारा के पालन को लेकर एक नया और कड़ा संदेश दिया जा रहा है।
पार्टी की नीति से अलग बयानबाजी बर्दाश्त नहीं
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई सांसद हो, विधायक हो या संगठन का कोई बड़ा पदाधिकारी, उसे पार्टी की निर्धारित नीति और विचारधारा के दायरे में रहकर ही सार्वजनिक बयान देने होंगे। यदि कोई नेता सार्वजनिक रूप से अपनी अलग राय रखता है, तो पार्टी अब उससे दूरी बनाने के बजाय खुलकर और तुरंत उसका विरोध भी कर सकती है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि खुले मंचों पर पार्टी की आधिकारिक सोच से अलग विचार रखने से कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है। इसी कारण अब ऐसे मामलों में तुरंत ऐक्शन लेने की रणनीति अपनाई जा रही है।
आंतरिक मंचों पर चर्चा की आजादी, बाहर अनुशासन अनिवार्य
पार्टी के भीतर चल रहे ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम और विभिन्न राज्यों में आयोजित की जा रही कार्यशालाओं के दौरान भी कार्यकर्ताओं और नेताओं को कड़े अनुशासन तथा पार्टी लाइन का पालन करने की सीख दी जा रही है। हालांकि, कांग्रेस ने इस बात को भी रेखांकित किया है कि संगठन के आंतरिक मंचों और बैठकों में अपनी राय रखने व खुलकर चर्चा करने की पूरी स्वतंत्रता पहले की तरह बनी रहेगी, लेकिन बैठक से बाहर निकलते ही सभी को एक सुर में बात करनी होगी।

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