लखनऊ अग्निकांड: मदद की गुहार लगाते रहे युवक, आग की लपटों में चली गई जान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पोस्टमार्टम हाउस में गहरा मातम पसरा हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 15 छात्र-छात्राओं के परिजन अपनों को खोने के गम में फूट-फूटकर रो रहे हैं। बदहवास माता-पिता और रिश्तेदारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार और बेबसी का माहौल है, जहाँ लोग अपने बच्चों के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद कर तड़प रहे हैं।

'पापा मुझे बचा लो, यहाँ निकलने का रास्ता नहीं है'

इस भयानक हादसे में जान गंवाने वालों में 23 वर्षीय गेम डिजाइनर सुखमनी सिंह भी शामिल थे। उनके लाचार पिता ने रोते हुए बताया कि दोपहर करीब 2 बजे उनके बेटे का फोन आया था। वह फोन पर बुरी तरह रो रहा था और उसने कहा, "पापा मुझे बचा लो, यहाँ चारों तरफ आग है और बाहर निकलने की कोई जगह नहीं बची है।" इसी तरह एक अन्य मृतक छात्र के रिश्तेदारों ने बताया कि उनके बच्चे ने दोपहर में अपनी चाची को फोन करके कहा था कि "चाची, हम सब अंदर फंस गए हैं, हमें किसी तरह यहाँ से निकाल लो।" यह बात करते-करते फोन कट गया और जब तक रिश्तेदार दोपहर 3 बजे मौके पर पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

परिजनों ने रेस्क्यू टीम पर उठाए सवाल

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े आक्रोशित और दुखी परिजनों ने राहत और बचाव दल (रेस्क्यू टीम) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और दमकल विभाग ने समय रहते सूझबूझ दिखाई होती और बगल वाली इमारत की छत से दीवार तोड़ने का फैसला जल्दी लिया होता, तो कई बच्चों को जिंदा बचाया जा सकता था। एक पीड़ित परिजन ने बताया कि जब रेस्क्यू टीम उनके सामने दीवार तोड़ रही थी, तब तक भी अंदर फंसे बच्चे से फोन पर बात हो रही थी, लेकिन टीम ने बेहद ढुलमुल तरीके से काम किया और देरी के कारण बच्चों ने दम तोड़ दिया।

शॉर्ट सर्किट और सिंगल गेट के कारण फैला धुआं

प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना के कारणों की जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर करीब 2 बजे बिल्डिंग के बेसमेंट में लगे एक एलईडी (LED) होर्डिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ था, जिससे चिंगारी भड़की। बेसमेंट में ज्वलनशील सामान होने के कारण आग ने तुरंत विकराल रूप ले लिया और पूरी तीन मंजिला इमारत में काले धुएं का गुबार भर गया। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी बिल्डिंग में आने-जाने के लिए केवल एक ही मुख्य दरवाजा (प्रवेश द्वार) था, जिसके कारण आग लगते ही वह रास्ता बंद हो गया और बच्चों को भागने का मौका नहीं मिला।

तारों के सहारे लटके और छतों से कूदे बच्चे

घटना के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दृश्य बेहद खौफनाक था। जब चारों तरफ धुआं भर गया, तो कुछ छात्रों ने जान बचाने के लिए खिड़की से लटक रहे बिजली के तारों को पकड़कर नीचे उतरने की कोशिश की। वहीं, दम घुटने और आग की लपटों से बचने के लिए कई बच्चों ने घबराहट में दूसरी और तीसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दर्दनाक मंजर के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

लापरवाही की जांच के लिए एसआईटी गठित

इस बेहद संवेदनशील और बड़े हादसे को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार द्वारा इस पूरे कांड की पड़ताल के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि रिहायशी और कमर्शियल इलाके की इस बिल्डिंग में भवन निर्माण के नियमों का उल्लंघन कैसे किया जा रहा था और अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के पुख्ता इंतजाम न होने के बावजूद यहाँ कोचिंग और गेमिंग जोन का संचालन किसकी अनुमति से हो रहा था।