भरतपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने महिला एवं बाल विकास विभाग में जारी घूसखोरी के खिलाफ एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए तीन महिला कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि शिकायतकर्ता को उसकी नौकरी में प्रताड़ित न करने और पद से न हटाने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर घूस की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये लेते हुए तीनों आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया।
नौकरी की सुरक्षा के नाम पर सौदा
एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार, ब्यूरो को एक पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि विभाग की कुछ महिला कर्मी उसे सेवा से निष्कासित न करने और बिना किसी व्यवधान के काम करने देने के बदले 50 हजार रुपये की मांग कर रही थीं। आपसी बातचीत के बाद यह सौदा 35 हजार रुपये में तय हुआ था। इस गोपनीय शिकायत की प्राथमिक जांच और सत्यापन कराने पर घूस मांगे जाने का मामला पूरी तरह सही पाया गया।
मुखर्जी नगर में जाल बिछाकर रंगे हाथ गिरफ्तारी
घूसखोरी की पुष्टि होने के उपरांत एसीबी रेंज की विशेष टीम ने त्वरित योजना तैयार की। शुक्रवार को मुखर्जी नगर क्षेत्र में जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये आरोपियों को सौंपे, वैसे ही पहले से मुस्तैद ब्यूरो की टीम ने तीनों महिला कर्मचारियों को रंगे हाथ दबोच लिया। पकड़ी गई आरोपियों में सूरजपोल सेक्टर की महिला पर्यवेक्षक क्षमा दहिया, कारे का नगला केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुनीता मुदगल और डी-ब्लॉक रंजीत नगर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता राजबाला शामिल हैं। टीम ने उनके कब्जे से रिश्वत की रकम भी सफलतापूर्वक बरामद कर ली है।
भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई शुरू
इस औचक छापेमारी के बाद से महिला एवं बाल विकास विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तीनों महिला कर्मियों को हिरासत में लेकर उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और इस सिंडिकेट में शामिल अन्य संभावित कड़ियों का पता लगाने के लिए मामले के सभी कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है।

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