भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन, पूर्व मुख्य अभियंता पर ठेकेदार से वसूली का आरोप

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा को घूसखोरी के संगीन आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। 17 जून को की गई इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 18 जून से 27 जून तक के लिए पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया है। एसीबी से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, भागीरथ वर्मा साल 2019 से 2023 के मध्य विभाग में मुख्य अभियंता के रसूखदार पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों के टेंडर जारी करने और निविदाओं से जुड़ी तकनीकी अड़चनों को दूर करने के एवज में ठेकेदारों से मोटी घूस वसूली थी। इस संबंध में मिली प्राथमिक शिकायत को सही पाते हुए एजेंसी ने 15 जून 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

रायपुर, बिलासपुर और उज्जैन के ठिकानों पर छापेमारी में मिली अकूत संपत्ति

प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए आरोपी अधिकारी के छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश स्थित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। जांच दल द्वारा रायपुर और बिलासपुर में छह अलग-अलग स्थानों पर तथा मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में दो ठिकानों पर सघन छापेमारी की गई। इस व्यापक तलाशी अभियान के दौरान जांचकर्ताओं ने करोड़ों रुपये की बेनामी और अवैध संपत्तियों से जुड़े भूखंडों के दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, डिजिटल साक्ष्य और कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। ईओडब्ल्यू और एसीबी की वित्तीय विशेषज्ञ टीम अब आरोपी अधिकारी की वास्तविक और वैध आय के स्रोतों की तुलना उनकी चल-अचल संपत्तियों से कर रही है ताकि आय से अधिक संपत्ति के अंतर का सटीक आकलन किया जा सके।

ठेकेदार से वसूले 1.68 करोड़ रुपये, नकद के साथ साजो-सामान की भी ली रिश्वत

अदालत में पेश की गई एफआईआर के मुताबिक, दुर्ग जिले के एक नामी कांट्रैक्टर राघवेंद्र तिवारी ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पद पर रहते हुए मुख्य अभियंता ने साल 2019 से 2023 के दौरान काम के बदले उनसे लगातार अवैध धन की उगाही की थी। ठेकेदार ने दावा किया है कि उसने अलग-अलग किस्तों में करीब 1.68 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि का भुगतान इस अधिकारी को किया था। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि केवल नकद ही नहीं, बल्कि अधिकारी ने अपने आलीशान बंगले के लिए महंगे एयर कंडीशनर (AC), कीमती टाइल्स, ग्रेनाइट पत्थर, एलईडी लाइटें, महंगे स्मार्टफोन और यहां तक कि सोने तथा हीरे की अंगूठियां भी ठेकेदार के पैसों से ही खरीदवाई थीं।

व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजेक्शन के सबूतों के आधार पर रिमांड में पूछताछ जारी

जांच एजेंसी को इस भ्रष्टाचार की कड़ियों को मजबूत करने के लिए शिकायतकर्ता की ओर से कई पुख्ता सबूत भी सौंपे गए हैं। एसीबी के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, ठेकेदार ने अधिकारी के साथ हुई व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट, बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड और खरीदे गए सामानों के असली बिल जांच दल को उपलब्ध कराए हैं, जिनमें अधिकारी के एक नजदीकी परिचित के बैंक खाते में दो लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने का स्पष्ट डिजिटल प्रमाण भी शामिल है। इन अकाट्य साक्ष्यों के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर के बाद अब पुलिस रिमांड के दौरान बंद कमरे में आरोपी पूर्व मुख्य अभियंता से कड़ी पूछताछ की जा रही है, जिससे इस बात की प्रबल संभावना है कि आने वाले दिनों में विभाग के कुछ अन्य बड़े चेहरों और मददगारों के नामों का भी खुलासा हो सकता है।