मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में शानदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों में भारी उत्साह है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते की उभरती संभावनाओं ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। सुबह के शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक सेंसेक्स 300.03 अंकों की बढ़त लेकर 76,564.36 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एन NSE) का निफ्टी भी 75.15 अंकों की मजबूती के साथ 23,929.05 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इसी सकारात्मक माहौल के चलते भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे मजबूत होकर 94.53 के स्तर पर पहुंच गया।
ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और तनाव घटने की उम्मीदों से बाजार के सेंटिमेंट्स को बड़ा बूस्ट मिला है। इस कारोबारी हफ्ते के शुरुआती दो दिनों में ही प्रमुख सूचकांक करीब तीन फीसदी तक की छलांग लगा चुके हैं। आज के बाजार की इस रफ्तार को आगे बढ़ाने में मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और वित्तीय (Finance) क्षेत्र की कंपनियों का अहम योगदान रहा, जहां शुरुआती कारोबार में ही एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की और दोनों कंपनियों के शेयर दो-दो प्रतिशत तक उछल गए।
वेदांता ग्रुप ने अनलॉक की बड़ी वैल्यू
कॉर्पोरेट जगत से आ रही बड़ी खबरों के बीच वेदांता समूह के डिमर्जर (व्यवसाय के पुनर्गठन) की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी रही। अपने अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित करने के बाद, समूह ने अपनी पांच लिस्टेड कंपनियों के माध्यम से निवेशकों के लिए लगभग 20 फीसदी की नई वैल्यू अनलॉक की है। बाजार के विश्लेषक कंपनी के इस बड़े कदम और पुनर्गठन की रणनीति को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं।
शुरुआती बढ़त के बाद नई कंपनियां लाल निशान में
हालांकि, डिमर्जर के बाद शेयर बाजार में एंट्री करने वाली वेदांता की चार नई कंपनियों के लिए लिस्टिंग का पहला दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। पहले दिन के शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बाद ये कंपनियां अपनी बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहीं और अंततः गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुईं। इसके बावजूद, ग्रुप द्वारा किए गए ओवरऑल 20% वैल्यू क्रिएशन ने निवेशकों के बड़े नुकसान के जोखिम को संभाल लिया।
रणनीतिक बदलावों से निवेशकों को फायदा
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर शांति की कोशिशों ने न सिर्फ भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों में भी नई जान फूंकने का काम किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वेदांता समूह का यह घटनाक्रम साफ तौर पर दर्शाता है कि जब भी कोई बड़ा कॉर्पोरेट घराना सही रणनीति के साथ अपने कारोबार का पुनर्गठन करता है, तो बाजार में शुरुआती उठापटक होने के बावजूद लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतरीन वैल्यू क्रिएट होने की संभावनाएं हमेशा मजबूत रहती हैं।

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