September 12, 2026

सरकारी धन खर्च, लेकिन सुविधा बेकार? 5 करोड़ की पार्किंग पर उठे सवाल

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े प्रशासनिक केंद्र महानदी भवन (मंत्रालय) में वीआईपी और आम नागरिकों के लिए पार्किंग की समस्या एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, मुख्य सचिव सहित राज्य के तमाम वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और रोजाना आने वाले सैकड़ों कर्मचारियों व आगंतुकों (विजिटर्स) के बावजूद यहां व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि करीब 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार की गई आधुनिक मल्टीलेवल पार्किंग का उपयोग अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते अधिकारियों से लेकर आम जनता तक को अपने वाहन खुले आसमान के नीचे तपती धूप और बारिश में खड़े करने पड़ रहे हैं।

समाधान के लिए बनाई गई थी परियोजना, टीन शेड लगाकर बंद किया रास्ता

मंत्रालय परिसर और उसके आसपास हर दिन बढ़ती वाहनों की तादाद को देखते हुए कुछ वर्ष पहले इस मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इस बड़ी परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) को सौंपी गई थी। ठेकेदार और एजेंसी ने भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण अब तक इसे मंत्रालय प्रशासन या संबंधित विभाग को हैंडओवर (हस्तांतरित) नहीं किया गया है। वर्तमान में इस नवनिर्मित पार्किंग के चारों तरफ टीन शेड लगाकर इसके प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया है, जिससे यह पूरी तरह बेकार पड़ी है।

अफसरों और आम जनता को झेलनी पड़ रही है दोहरी मार

  • वाहनों को नुकसान: मंत्रालय आने वाले सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन फिलहाल खुले मैदानों और झाड़ियों के बीच खड़े किए जा रहे हैं। भीषण गर्मी में दिनभर सीधी धूप पड़ने और मानसूनी बारिश के कारण वाहनों के पार्ट्स और कलर खराब हो रहे हैं।

  • आम लोगों पर ई-चालान की गाज: सबसे ज्यादा परेशानी मंत्रालय में अपनी समस्याएं लेकर दूर-दराज से आने वाले आम लोगों को हो रही है। परिसर के भीतर निर्धारित स्थान न होने के कारण मजबूरी में लोग अपनी गाड़ियां सड़कों के किनारे खड़ी कर देते हैं, जिस पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा ई-चालान काटने की दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। लोगों का सवाल है कि जब जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये से पार्किंग बनकर तैयार है, तो उसे ताले में बंद क्यों रखा गया है।

हैंडओवर के लिए लगातार पत्राचार, पर एनआरडीए की अपनी दलीलें

मंत्रालय के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और सुरक्षा विंग की ओर से इस पार्किंग को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए निर्माण एजेंसी को कई बार कड़े पत्र लिखे जा चुके हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि व्यवस्थित पार्किंग शुरू होने से मुख्य द्वारों के पास लगने वाला जाम खत्म होगा और मंत्रालय की सुरक्षा अभेद्य होगी।

दूसरी तरफ, एनआरडीए के अधिकारियों का एक अलग ही तर्क सामने आया है। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट को अभी पूरी तरह अंतिम रूप नहीं दिया गया है। नई योजना के तहत इस मल्टीलेवल पार्किंग के ऊपर कुछ अतिरिक्त सरकारी कार्यालय और नए केबिन विकसित करने का एक संशोधित प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसी अतिरिक्त निर्माण की प्लानिंग के कारण फिलहाल पार्किंग को चालू करने की अनुमति नहीं दी गई है।

अटल नगर के अन्य सरकारी भवनों में भी पार्किंग की किल्लत

सड़क किनारे और खुले में वाहन खड़े करने की यह समस्या केवल मंत्रालय तक ही सीमित नहीं है। नवा रायपुर (अटल नगर) में स्थित इंद्रावती भवन (विभागाध्यक्ष कार्यालय) सहित कई अन्य प्रमुख सरकारी भवनों और संचालनालयों में भी पर्याप्त और शेड वाली पार्किंग व्यवस्था नहीं है। करोड़ों रुपये के बजट से चमचमाती सड़कें और आलीशान दफ्तर तो बना दिए गए, लेकिन वाहनों के रख-रखाव जैसे जरूरी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। अब देखना होगा कि इस गंभीर अव्यवस्था और लेती-लतीफी पर शासन स्तर पर कब जवाबदेही तय की जाती है।