दिल्ली। राजधानी में स्ट्रीट फूड संस्कृति को एक आधुनिक और व्यवस्थित रूप देने के लिए नगर निगम (MCD) ने एक बड़ी योजना तैयार की है। विदेशों के हाईटेक फूड कोर्ट और भारत के इंदौर व सूरत जैसे शहरों के सफल मॉडलों से प्रेरणा लेकर दिल्ली के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में अत्याधुनिक फूड हब बनाए जाएंगे। इसके लिए निगम ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर पांच चिन्हित स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है।
दिल्ली में सड़क किनारे मिलने वाले खानपान को बेहद पसंद किया जाता है और यह शहर की संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। हालांकि, मौजूदा समय में ये स्टॉल अव्यवस्थित ढंग से चलते हैं, जिससे यातायात में बाधा, गंदगी और अतिक्रमण जैसी परेशानियां खड़ी होती हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए इस नई परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है।
इन पांच स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे फूड हब
इस योजना के तहत सलीम गढ़ किला के सामने, पीतमपुरा टीवी टावर के पास, रिंग रोड स्थित मिलेनियम पार्क, जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर और वसंत विहार को चुना गया है। इन प्रस्तावित फूड हब में खानपान के साफ-सुथरे स्टॉल, लोगों के बैठने के लिए उचित जगह, बेहतरीन लाइटिंग, पब्लिक टॉयलेट, पार्किंग, पीने का पानी, कचरा प्रबंधन और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही, खाने-पीने की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच भी की जाएगी।
देश-विदेश के सफल खानपान मॉडलों का अध्ययन
इस परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले देश और दुनिया के कई मशहूर फूड मॉडलों का बारीकी से अध्ययन किया गया है। इसमें खास तौर पर इंदौर के प्रसिद्ध 'छप्पन दुकान' और 'सराफा बाजार' के मॉडल को आधार बनाया गया है, जिन्होंने स्ट्रीट फूड को एक बड़े पर्यटन केंद्र में बदल दिया है। इसके अलावा सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों के हॉकर सेंटर्स और फूड कोर्ट के कामकाज के तरीकों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
भूमि आवंटन की चुनौती और स्ट्रीट वेंडर्स को मिलने वाले फायदे
फिलहाल जिन पांच जगहों पर ये फूड हब बनने हैं, वहां नगर निगम के पास अपनी जमीन नहीं है। यह भूमि केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों के अधीन आती है, जिसके लिए जमीन ट्रांसफर करने का आग्रह किया गया है। मंजूरी मिलते ही इस प्रोजेक्ट पर चरणबद्ध तरीके से काम शुरू होगा। इस योजना से सड़क किनारे दुकान लगाने वाले रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। अब तक उन्हें अतिक्रमण हटाओ अभियानों और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस हब के बनने से उन्हें व्यवसाय के लिए एक स्थाई और सुरक्षित जगह मिलेगी, जिससे उनकी आजीविका मजबूत होगी।

More Stories
पटना फैक्ट्री अग्निकांड के बाद बड़ा एक्शन, फायर ऑडिट के लिए उतरीं 27 टीमें
30 साल पुराने जल विवाद का अंत, अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा-राजस्थान ने किया समझौता
सरकारी स्कूल में गिरी छत की पट्टियां, बच्चों के आने से पहले टला बड़ा हादसा