कोटपूतली। सरूण्ड थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अजीतपुरा कलां-कुजोता में स्थित नेशनल लाइमस्टोन कंपनी की खदान पर ग्रामीणों और खनन प्रबंधन के बीच हुए भीषण पथराव, लाठी-भाटा जंग और हिंसक झड़प के मामले में कानून का शिकंजा और कस गया है। स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस हिंसक वारदात में संलिप्त दो और उपद्रवियों को दबोच लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल पांच आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जिनमें से एक आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल गई है जबकि अन्य से गहन पूछताछ जारी है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी स्पेशल टीम और दो नए आरोपी गिरफ्तार
सरूण्ड थाना प्रभारी यशपाल सिंह ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि 1 जून को अजीतपुरा कलां और कुजोता की सीमा पर स्थित स्वीकृत खनन क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच विवाद ने उग्र रूप ले लिया था, जिसके बाद वहां जमकर तोड़फोड़ और मारपीट हुई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के आदेश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान और डीएसपी उमेश निठारवाल के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस स्पेशल टीम ने डिजिटल साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए प्रवीण (20) निवासी ढाणी मांझीवाला (भाबरू) और विजय सिंह (23) निवासी कारोड़ा (बहरोड़) को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेशी के दौरान विजय सिंह को जमानत मिल गई, जबकि प्रवीण को एक दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है। इससे पहले पुलिस दीपक कुमार यादव, सुनील पांचाल और अनुराग सिंह शेखावत को एससी-एसटी एक्ट व आर्म्स एक्ट के तहत जेल भेज चुकी है।
मुख्य हमलावरों की गिरफ्तारी न होने पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
इस बीच, आंदोलन कर रहे ग्रामीणों और खनन संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले के मुख्य साजिशकर्ताओं को जल्द से जल्द पकड़ने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वारदात के दिन तीन कैंपर गाड़ियों में भरकर करीब 20 हथियारबंद बदमाश खदान पर पहुंचे थे, जिन्होंने दहशत फैलाने के लिए सरेआम फायरिंग की और लाठियां भांजीं। संघर्ष समिति का कहना है कि पुलिस ने अब तक जिन लोगों को पकड़ा है, वे केवल खदान के मामूली कर्मचारी हैं, जबकि एफआईआर में नामजद रसूखदार और मुख्य आरोपी राजनीतिक संरक्षण के चलते अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रभावशाली चेहरों को बचाने का प्रयास बंद नहीं हुआ और उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को दोबारा और उग्र रूप में शुरू करने को मजबूर होंगे।
300 दिनों से चल रहा था धरना और एक जून को हुआ खूनी संघर्ष
गौरतलब है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी द्वारा की जा रही डीप होल ब्लास्टिंग और खनन के खिलाफ स्थानीय ग्रामीण पिछले 300 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हुए थे। गत सप्ताह ही प्रशासन के साथ तीन सूत्रीय लिखित समझौते के बाद यह धरना समाप्त हुआ था। घटनाक्रम के अनुसार, 30 मई को प्रशासन ने धरना स्थल को हटाकर सामान जब्त कर लिया था, जिससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने 31 मई को फिर से धरना शुरू करने की तैयारी की। आरोप है कि इसी दौरान खनन पक्ष ने धरना स्थल पर भारी मात्रा में मिट्टी और पत्थर डंप करवा दिए, जिससे 1 जून को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और खूनी संघर्ष हो गया जिसमें 10 ग्रामीण जख्मी हुए। पुलिस को मौके से खाली कारतूस भी मिले हैं, हालांकि अस्पताल प्रशासन या पुलिस ने गोली लगने से किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं की है और फायरिंग का यह दावा फिलहाल पुलिस तफ्तीश के दायरे में है।

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