अग्निवीरों को मिल सकती है नई भूमिका, फायर सर्विस में भर्ती का सुझाव

नई दिल्ली। दिल्ली में आपातकालीन सेवाओं को अधिक चुस्त-दुरुस्त और आधुनिक बनाने के लिए उपराज्यपाल टीएस संधू ने एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने रखा है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए एलजी ने सुझाव दिया कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (फायर ब्रिगेड) में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए सेना से सेवामुक्त हुए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं ली जानी चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम से दमकल विभाग में स्टाफ की भारी कमी तो दूर होगी ही, साथ ही राजधानी को आपदाओं से निपटने के लिए पहले से प्रशिक्षित, ऊर्जावान और अनुशासित युवाओं का एक मजबूत सुरक्षा कवच भी मिल सकेगा। इस बैठक में दिल्ली के विभिन्न कोनों में नए फायर स्टेशन खोलने और आपातकालीन रिस्पांस सिस्टम को अपग्रेड करने पर भी गहन मंथन किया गया।

इमरजेंसी वाहनों को जाम से बचाने के लिए लागू होगा एआई रूट मैपिंग सिस्टम

राजधानी की सड़कों पर अक्सर लगने वाले भारी जाम से निपटने और आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षा के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। इसके तहत शहर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित एक नया ट्रैफिक मैनेजमेंट और रूट मैपिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। यह आधुनिक प्रणाली आगजनी या बड़े हादसों के वक्त दमकल की गाड़ियों और एंबुलेंस को रियल-टाइम में सबसे छोटा, सुरक्षित और बिना जाम वाला रास्ता बताएगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन कीमती पलों को बचाना है, जिन पर किसी पीड़ित की जिंदगी और मौत निर्भर करती है। यह एआई सिस्टम दिल्ली में लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड और ट्रैफिक डेंसिटी का पल-पल विश्लेषण करेगा, जिससे दिल्ली पुलिस और फायर सर्विस के कंट्रोल रूम आपस में मिलकर बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी कॉरिडोर बनाने के लिए अतिरिक्त ट्रैफिक कर्मियों को भी तुरंत सड़क पर उतारा जाएगा।

भविष्य की सुरक्षा के लिए महानगर के ट्रैफिक पैटर्न का होगा गहन अध्ययन

ट्रैफिक पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि यह एआई आधारित नई प्रणाली न केवल संकट के समय तत्काल रास्ता सुझाएगी, बल्कि दीर्घकालिक स्तर पर पूरे महानगर के ट्रैफिक पैटर्न का गहराई से अध्ययन भी करेगी। इस डेटा एनालिसिस से यह समझने में आसानी होगी कि किस विशिष्ट क्षेत्र में, किस दिन और किस समय सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है। इन आंकड़ों की मदद से भविष्य के लिए स्थायी 'इमरजेंसी कॉरिडोर' (आपातकालीन मार्ग) चिन्हित किए जा सकेंगे, जिससे क्षेत्रवार नई और बेहद प्रभावी आपातकालीन कार्ययोजनाएं (इमरजेंसी रिस्पांस प्लान) तैयार करने में मदद मिलेगी।

वैश्विक तर्ज पर तकनीक, डेटा और मजबूत संचार नेटवर्क से लैस होगी फायर सर्विस

दिल्ली की इस नई योजना को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जैसे लंदन, सिंगापुर और न्यूयॉर्क जैसे दुनिया के चुनिंदा महानगरों में देखने को मिलता है। इन अंतरराष्ट्रीय शहरों ने अपनी फायर सर्विस को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक, क्लाउड डेटा और मजबूत वायरलेस संचार नेटवर्क से जोड़ रखा है। विदेशी प्रणालियों में किस क्षेत्र में आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा है, कहां नई बहुमंजिला इमारतें खड़ी हुई हैं और किस समय सड़कों पर वाहनों का दबाव रहता है—इन सभी लाइव आंकड़ों के आधार पर ही संसाधनों और दमकल वाहनों की तैनाती की जाती है। उदाहरण के लिए, सिंगापुर में संकट की कॉल आने पर सिर्फ नजदीकी स्टेशन से गाड़ी नहीं भेजी जाती, बल्कि ट्रैफिक की स्थिति और वहां मौजूद संसाधनों के जोखिम स्तर का आकलन करके वाहन रवाना किए जाते हैं, जिसे अब दिल्ली में भी लागू करने की तैयारी है।