प्रसूताओं की बिगड़ी हालत से मचा हड़कंप, संक्रमण रोकने के लिए अस्पताल ने उठाया बड़ा कदम

बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन (सी-सेक्शन) के बाद छह प्रसूताओं की किडनी पर गंभीर असर पड़ने की घटना से चिकित्सा महकमे में खलबली मची हुई है। इस आपातकालीन स्थिति के बीच अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन थिएटर और वार्डों में किसी भी संभावित इंफेक्शन (संक्रमण) की आशंका को खत्म करने के लिए एक बड़ा सुरक्षात्मक कदम उठाया है। प्रशासन द्वारा अस्पताल परिसर में जल्द ही एक अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन स्थापित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है, जिससे किसी भी घातक जीवाणु या संक्रमण का वक्त रहते पता लगाया जा सके और भर्ती मरीजों को सुरक्षित माहौल में बेहतर इलाज मिल सके।

ऑपरेशन के बाद आईसीयू में डायलिसिस पर जिंदगी की जंग लड़ रहीं छह प्रसूताएं

पीबीएम अस्पताल के प्रसूति वार्ड में ऑपरेशन से प्रसव होने के करीब 10 से 15 दिनों के भीतर अचानक छह महिलाओं की तबीयत एक के बाद एक बिगड़ने लगी। इन प्रसूताओं के शरीर में यूरिन (पेशाब) का रुकना, खून में प्लेटलेट्स की तेजी से कमी होना और किडनी फेलियर जैसी अत्यंत गंभीर और जानलेवा चिकित्सकीय जटिलताएं देखी गईं। मामले की भयावहता को देखते हुए सभी पीड़ित महिलाओं को तुरंत गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में शिफ्ट किया गया है, जहां गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों को जीवन रक्षक डायलिसिस सपोर्ट पर रखा गया है।

अस्पताल अधीक्षक ने बनाई जांच कमेटी और एक मरीज वेंटिलेटर पर

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. घीया ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशीलता से लेते हुए इसकी गहराई से जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष मेडिकल कमेटी का गठन कर दिया है। यह विशेषज्ञ समिति सभी पीड़ित महिलाओं की केस हिस्ट्री, ऑपरेशन के दौरान दी गई दवाओं और उपचार की बारीकी से समीक्षा कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, वर्तमान में पांच प्रसूताओं की हालत नियंत्रण में और स्थिर बनी हुई है, जबकि एक महिला मरीज जिसके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का बयान और संक्रमण के कारणों पर संशय बरकरार

इधर, एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने इस रहस्यमयी चिकित्सकीय घटनाक्रम पर कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) होने के पीछे अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग), मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन या कोई अंदरूनी बैक्टीरियल संक्रमण जैसे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। जांच पूरी होने से पहले किसी भी एक नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अस्पताल प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि नई इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन के चालू होने के बाद भविष्य में ऐसे संदिग्ध संक्रमणों की तुरंत पहचान हो सकेगी। फिलहाल सभी को जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही प्रसूताओं के गुर्दे खराब होने के असली और सटीक कारणों का पर्दाफाश हो सकेगा।