जैसलमेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में डूबे हुए कर्ज की रिकवरी को लेकर दी जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक ने कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सालों से अटके पड़े करोड़ों रुपये के ऋण को वसूलने के लिए बैंक प्रबंधन अब एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसने खाताधारकों, काश्तकारों और विधिक विशेषज्ञों के बीच एक नई कानूनी और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। बैंक प्रशासन का कहना है कि जिन खाताधारकों ने बैंक से मोटा कर्ज लेने के बाद भी लंबे समय से एक किश्त नहीं चुकाई है, उनकी पहचान को सरेआम उजागर किया जाएगा और इस कार्रवाई की जद में मुख्य कर्जदार के साथ-साथ उनके गारंटर (जमानतदार) भी आएंगे।
350 करोड़ रुपये की रिकवरी का लक्ष्य और डिफॉल्टरों की सूची तैयार
दी जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) ओमपाल सिंह ने बताया कि बैंक के पास ऐसे डिफॉल्टर खातों की भरमार है, जिन्होंने वर्षों से भुगतान नहीं किया है। बैंक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 100 करोड़ रुपये की डूबत राशि सीधे तौर पर एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) बन चुकी है, जबकि अन्य ऋण योजनाओं को मिलाकर कुल 350 करोड़ रुपये की बकाया वसूली बैंक के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। इस भारी वित्तीय संकट से बैंक की नई लोन बांटने की क्षमता प्रभावित हो रही है, जिसके चलते किसान संबल योजना, किसान कल्याण योजना और अल्पकालिक कृषि व गैर-कृषि ऋण लेने वाले बड़े बकायेदारों की शाखावार सूची तैयार की जा रही है। पहले चरण में 25 सबसे बड़े डिफॉल्टरों के नाम समाचार पत्रों में छपवाए जाएंगे।
चौराहों पर लगेंगे बकायेदारों के होर्डिंग्स और जमानतदारों पर भी कसेगा शिकंजा
बैंक की प्रस्तावित कार्ययोजना के मुताबिक, नोटिस के बाद भी भुगतान न करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ दूसरे चरण में बेहद आक्रामक कदम उठाया जाएगा। इसके तहत शहर और ग्रामीण कस्बों के मुख्य चौराहों, बाजारों और व्यस्ततम सार्वजनिक स्थलों पर बड़े-बड़े होर्डिंग और फ्लेक्स बोर्ड टांगे जाएंगे, जिन पर बकायेदारों के नाम, पते और उनकी तस्वीरों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। बैंक प्रबंधन ने साफ किया है कि इस सामाजिक दबाव वाली कार्रवाई से वे लोन की गारंटी लेने वाले जमानतदारों को भी नहीं बख्शेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन कायम करने और जनता के डूबे पैसे को वापस लाने की आखिरी कोशिश है।
निजता के अधिकार और बैंकिंग नियमों को लेकर कानूनी विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
बैंक के इस सख्त और अनोखे वसूली अभियान पर अब कानूनी सवालिया निशान भी लगने लगे हैं। जैसलमेर के वरिष्ठ अधिवक्ता और जिला बार एसोसिएशन के सदस्य हेमसिंह राठौड़ ने इस संबंध में अपनी राय रखते हुए कहा कि सामान्य बैंकिंग कानूनों और रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस में कर्ज न चुकाने वालों या उनके गारंटरों की तस्वीरें सार्वजनिक चौराहों पर प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट या सीधा विधिक प्रावधान नजर नहीं आता। उन्होंने सचेत किया कि किसी भी नागरिक की पहचान और फोटो को इस तरह सरेआम चौक-चौराहों पर टांगने से भारतीय संविधान द्वारा दिए गए निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) और मानवीय सम्मान का हनन हो सकता है। यदि बैंक बिना किसी ठोस कानूनी संरक्षण के ऐसा कदम उठाता है, तो आने वाले दिनों में बैंक को अदालतों में बड़े कानूनी मुकदमों और विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

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