सीमा विवाद पर खुले मन से बातचीत, भारत-नेपाल संबंधों में सुधार का संकेत

इंडोनेशिया। पड़ोसी देशों के साथ मजबूत होते रिश्तों के बीच राजधानी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का बड़ा केंद्र बन गई है। नेपाल की नई सरकार के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का मौजूदा भारत दौरा दोनों देशों के बीच सहयोग की एक नई पटकथा लिख रहा है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नई सरकार की ओर से यह पहला उच्च स्तरीय संवाद है, जो सीमा मुद्दों पर हालिया तनाव को भुलाकर द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा में ले जाने के नेपाल के गंभीर प्रयासों को दर्शाता है। नेपाल की इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करना और साझा समृद्धि के नए रास्ते तलाशना है।

नेपाल का व्यावहारिक रुख और सीमा विवाद पर कूटनीति

भारत दौरे पर आए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने साफ किया है कि उनकी सरकार भारत के साथ संबंधों को किसी भू-राजनीतिक चश्मे या पूर्वाग्रह से नहीं देखती है। वे भारत को यह भरोसा दिलाने में पूरी तरह सक्रिय दिखे कि नेपाल की नई सरकार पुरानी राष्ट्रवादी बयानबाजी के बजाय धरातल पर व्यावहारिक जुड़ाव को प्राथमिकता देती है। नेपाल यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद उत्सुक है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद आपसी व्यापार, यातायात और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के आड़े न आए। नेपाल अब सीमा मुद्दों को किसी भी अति-संवेदनशील पूर्वाग्रह से दूर रखकर पूरी तरह से राजनयिक माध्यमों से सुलझाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।

भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होगी सामरिक साझेदारी

नेपाल के साथ संवाद के बीच, भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के अपने बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा और व्यापार के मोर्चे पर बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो के साथ मिलकर '8वीं भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग बैठक' (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने व्यापक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की मजबूत प्रतिबद्धता जताई है।

इन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी आपसी सहमति

भारत और इंडोनेशिया के बीच हुई इस बैठक में राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा, समुद्री सहयोग, व्यापार और निवेश, औषधि (फार्मास्युटिकल), स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, और सांस्कृतिक क्षेत्रों सहित तमाम द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों ही देश आपसी आर्थिक और सामरिक हितों को साधने के साथ-साथ लोगों के बीच परस्पर आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ करने के उपायों पर आगे बढ़ रहे हैं। यह बैठक आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा के चक्र को और मजबूत करेगी।