Petrol-Diesel Rate Today: आज बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम या कीमतें रहीं स्थिर? जानें ताजा रेट

नई दिल्ली। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान ईंधन के दामों में लगातार आई तेजी के बाद आज देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण ऊर्जा आपूर्ति में लगातार बाधाएं आ रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के भाव में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इस बीच, बाजार विशेषज्ञ इस बात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं कि तेल कंपनियां आने वाले दिनों में ईंधन के दामों में क्या बदलाव करती हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती लागत और तेल कंपनियों का घाटा

ईंधन की कीमतों में हाल ही में देखी गई बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का महंगा होना और सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर बढ़ता वित्तीय बोझ है। पेट्रोलियम उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में तेल की कीमतों में कई बार इजाफा किए जाने के बावजूद तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अब भी काफी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है। रिपोर्टों की मानें तो यह घाटा इतना बड़ा है कि बाजार में इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि कंपनियां अपने मुनाफे को पटरी पर लाने के लिए आने वाले समय में कीमतों को और बढ़ा सकती हैं।

पिछले कुछ हफ्तों में कितना महंगा हुआ ईंधन?

बीते कुछ हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 मई के बाद से दोनों ईंधनों के दामों में सिलसिलेवार ढंग से कई बार वृद्धि की गई, जिसके चलते देश के विभिन्न शहरों में तेल की कीमतें कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की खरीद और उसे रिफाइन करने की बढ़ती लागत की भरपाई करने के लिए किश्तों में इन दामों को बढ़ाया है।

उपभोक्ताओं और बाजार पर आगामी बदलावों का असर

ईंधन के दामों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब और माल ढुलाई की लागत पर पड़ रहा है। हालांकि आज कीमतों में कोई बदलाव न होने से उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक संकट और तेल कंपनियों के घाटे को देखते हुए आने वाले दिनों में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ आने वाले हफ्तों में घरेलू तेल दरों पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के प्रभाव का लगातार आकलन कर रहे हैं।