भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) का पूरी तरह कायाकल्प करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना' और 'पीएम ई-बस सेवा' को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए। सरकार का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा मजबूत ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करना है, जो राज्य के छोटे शहरों, सुदूर ग्रामीण इलाकों और जिला मुख्यालयों को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ सके।
इस योजना के तहत पूरे मध्य प्रदेश को सात प्रमुख परिवहन क्षेत्रों (जोन) में बांटा जाएगा, जिनमें इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और रीवा शामिल हैं। इन्हीं केंद्रों के जरिए बसों के संचालन की पूरी नई व्यवस्था संभाली जाएगी। योजना के मुताबिक, राज्य के 620 इंटरसिटी (शहरों के बीच) रास्तों पर 2,432 नई बसों का संचालन किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस कदम से लोगों की निजी गाड़ियों पर निर्भरता कम होगी और यात्रा का खर्च भी घटेगा।
जुलाई से शुरू होगा नया सफर, इंदौर बनेगा पहला केंद्र
इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत के लिए इंदौर शहर को पहला मुख्य केंद्र बनाया गया है। 'पीएम ई-बस सेवा' के तहत जुलाई महीने से इंदौर में 150 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। ये ई-बसे केवल इंदौर शहर के भीतर ही नहीं चलेंगी, बल्कि आसपास के उपनगरीय (सब-अर्बन) इलाकों को भी जोड़ेंगी। इंदौर और उसके आसपास के लिए कुल 28 रूट तय किए गए हैं, जहां कुल 784 बसें दौड़ेंगी।
इलेक्ट्रिक बसें चलने से शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। इन बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग (सीसीटीवी) और आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे हर दिन सफर करने वाले हजारों यात्रियों को एक आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।
गांव, शहर और राज्यों को जोड़ेगा नया नेटवर्क
इस नई परिवहन योजना का दायरा बेहद बड़ा है। सरकार ने राज्यभर में कुल 1,164 ऐसे रास्तों की पहचान की है, जहां अलग-अलग श्रेणियों की कुल 5,206 बसों को चलाने का प्रस्ताव है। इस नेटवर्क को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है:
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सिटी बस सेवा: शहरों के भीतर स्थानीय यात्रा के लिए।
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इंटर-सिटी बस सेवा: मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों और गांवों को आपस में जोड़ने के लिए।
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अंतरराज्यीय बस सेवा (Interstate): दूसरे राज्यों के सफर के लिए। अकेले इंदौर से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए 101 रास्तों पर 276 बसें चलाई जाएंगी। इंदौर के बाद बाकी बचे छह क्षेत्रीय मुख्यालयों में भी इसी तर्ज पर काम शुरू होगा।
निजी बसों पर नहीं पड़ेगा असर, नए रोजगार भी मिलेंगे
सरकार ने साफ किया है कि इस सरकारी योजना के आने से वर्तमान में चल रही निजी (प्राइवेट) बस सेवाओं पर कोई पाबंदी नहीं लगेगी, वे पहले की तरह ही चलती रहेंगी। नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने, बसों की निगरानी और यात्री सुरक्षा के लिए अलग से नए विभाग बनाए जाएंगे। इस पूरी परिवहन व्यवस्था को प्रोफेशनल तरीके से चलाने के लिए अगले चार सालों में चरणबद्ध तरीके से 1,190 नए पदों पर भर्तियां भी की जाएंगी।
बदलेगी तस्वीर: यदि यह योजना समय पर जमीन पर उतरती है, तो मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। इससे ग्रामीण और छोटे कस्बों के लोगों को जिला मुख्यालयों तक आने-जाने के लिए बेहद सस्ती, सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवा मिल सकेगी।

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