सीएम रेखा गुप्ता का एक्शन: कांवड़ समिति का हुआ पुनर्गठन, कपिल मिश्रा को मिली अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी

नई दिल्ली | आगामी पावन कांवड़ यात्रा के सुचारू और भव्य संपादन के लिए दिल्ली सरकार ने कांवड़ समिति के पुनर्गठन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण समिति की कमान प्रदेश के संस्कृति एवं कानून मंत्री कपिल मिश्रा को सौंपी है। इसके साथ ही, राजधानी के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विधायकों को इस समिति में बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दिल्ली सरकार शिवभक्तों की सेवा, सुरक्षा और सुविधा के लिए उत्कृष्ट प्रबंध करेगी, जिसके तहत कांवड़ शिविरों को विशेष वित्तीय व प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा।

कपिल मिश्रा के हाथों में कमान, पांच विधायक संभालेंगे जिम्मेदारी

नवनियुक्त समिति की संरचना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा कांवड़ समिति के अध्यक्ष पद का दायित्व संभालेंगे। उनके साथ विधायक अजय महावर, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि कांवड़ यात्रा महज एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक ताने-बाने और जन-आस्था का एक विराट संगम है। सावन के महीने में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला केसरिया सैलाब देश की एकता और अखंडता का अनुपम उदाहरण पेश करता है।

कागजी कामकाज से आगे सेवा और श्रद्धा का प्रतीक बनी व्यवस्थाएं

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाएं अब केवल फाइलों और कागजी प्रशासनिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय राजधानी में सेवा, श्रद्धा और आतिथ्य सत्कार का एक जीवंत प्रतीक बन चुकी है। सरकार का परम ध्येय है कि दिल्ली की सीमा में कदम रखने वाले प्रत्येक कांवड़िए को देवतुल्य सम्मान मिले। अध्यक्ष कपिल मिश्रा के नेतृत्व में यह नवगठित समिति जल्द ही दिल्ली के सभी जिलाधिकारियों (DM), दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों, लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्वास्थ्य महकमे के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा कांवड़ मार्गों का निर्धारण, वाटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चौबीस घंटे चिकित्सा शिविर, निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना होगा।

बीते वर्षों में शिविरों की संख्या दोगुनी से अधिक हुई, सीधे खातों में भेजी मदद

सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में शिवभक्तों की सेवा के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024 में जहां दिल्ली में केवल 170 कांवड़ शिविरों को अनुमति मिली थी, वहीं वर्ष 2025 में सरकार की सरल एवं सुगम नीतियों के कारण रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई और पूरी दिल्ली में कुल 374 पंजीकृत शिविर स्थापित किए गए। इन आयोजनों को सुगम बनाने के लिए पुरानी टेंडर व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब सीधे समितियों के बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की पारदर्शी वित्तीय सहायता भेजी जा रही है, जिसका आधा हिस्सा एडवांस के तौर पर पहले ही जारी कर दिया जाता है। इसके अलावा, आयोजकों को राहत देने के लिए प्रत्येक पंजीकृत शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थाई मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 फीसदी की भारी छूट भी दी गई है।