नई दिल्ली | 'कॉकरोच जनता पार्टी' के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित (ब्लॉक) किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और 'एक्स' कॉर्पोरेशन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस व्यंग्यात्मक डिजिटल संगठन के ब्लॉक किए गए मुख्य अकाउंट को तुरंत चालू (बहाल) करने का अंतरिम निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने साफ किया कि मामले की पूरी न्यायिक समीक्षा और दोनों पक्षों का जवाब आने के बाद ही इस पर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
डिजिटल संगठन के संस्थापक की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट में यह सुनवाई 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दायर की गई एक याचिका पर हुई। याचिका में उन्होंने भारत सरकार द्वारा उनके सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के कदम को चुनौती देते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन बताया है। दीपके की इस रिट याचिका पर हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने सुनवाई की और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किए।
मुख्य न्यायाधीश की 'कॉकरोच टिप्पणी' के बाद अस्तित्व में आया संगठन
याचिकाकर्ता अभिजीत दीपके, जो पूर्व में आम आदमी पार्टी (AAP) से भी जुड़े रहे हैं, ने हाल ही में 15 मई को इस अनोखे डिजिटल संगठन की शुरुआत की थी। दरअसल, यह पूरा विवाद मुख्य न्यायाधीश सुरेश कांत द्वारा सीनियर एडवोकेट की पदवी से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में की गई 'कॉकरोच और परजीवी' वाली टिप्पणी के बाद पैदा हुआ था। हालांकि, 16 मई को मुख्य न्यायाधीश ने खुद इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए दुख जताया था कि मीडिया ने उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया। उन्होंने साफ किया था कि उनकी यह टिप्पणी कानूनी पेशे में फर्जी और बोगस डिग्री के सहारे आने वाले लोगों के लिए थी, न कि देश के युवाओं या नए वकीलों के लिए।
मुख्य अकाउंट ब्लॉक होने पर नए नाम से डिजिटल आंदोलन जारी
विवाद बढ़ने के बाद, बीती 21 मई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मूल एक्स हैंडल को भारत में पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया था। इसके जवाब में संगठन ने तुरंत एक नया हैंडल 'कॉकरोच इज बैक' नाम से शुरू कर दिया, जो सोशल मीडिया पर बेहद कम समय में काफी लोकप्रिय हो गया है और वर्तमान में इसके 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। यह पूरा मामला अपने अनोखे प्रतीकवाद और डिजिटल रणनीति को लेकर चर्चा में बना हुआ है, जहाँ समर्थक कॉकरोच के प्रतीक को सरकार और व्यवस्था के खिलाफ एक डिजिटल विरोध के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

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