वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान जल्द ही ऐतिहासिक 'अब्राहम अकॉर्ड' (Abraham Accords) का हिस्सा बन सकता है। ट्रंप ने इस कूटनीतिक बातचीत में मदद के लिए खाड़ी (Gulf) देशों का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मिडल ईस्ट के देशों ने अमेरिका का बहुत सहयोग किया है, जिससे इस समझौते को मजबूती मिली है और संभव है कि आने वाले समय में ईरान भी इसमें शामिल हो जाए।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार किया गया एक ऐतिहासिक समझौता है।
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मुख्य उद्देश्य: इसका मकसद इजरायल और अरब देशों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर कूटनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाना है।
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शुरुआत: साल 2020 में इस समझौते के तहत सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ दोस्ती का हाथ मिलाया था। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए।
दिलचस्प बात: इस समझौते को बनाने का एक बड़ा मकसद ही यह था कि इजरायल और अरब देश मिलकर क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोक सकें। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति खुद ईरान को इसमें शामिल करने की बात कह रहे हैं।
ईरान का शामिल होना क्यों है बेहद मुश्किल?
मौजूदा हालातों को देखते हुए ईरान का इस समझौते से जुड़ना बहुत पेचीदा और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है:
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पुरानी दुश्मनी: साल 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान और इजरायल एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे हैं।
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फिलिस्तीन का मुद्दा: ईरान हमेशा से इस समझौते का विरोध करता आया है और उसका मानना है कि इजरायल से हाथ मिलाना फिलिस्तीन के लोगों के साथ धोखा है।
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ईरान का पुराना रुख: इससे पहले भी जब ट्रंप ने ऐसी संभावना जताई थी, तब ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कह दिया था कि तेहरान (ईरान) इजरायल को कभी एक देश के रूप में मान्यता नहीं देगा।
दुनिया भर के विशेषज्ञों की नजर
फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जवाब सामने नहीं आया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप का यह दावा सच साबित होता है, तो यह पश्चिम एशिया की पूरी व्यवस्था और समीकरण को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस कूटनीतिक हलचल पर टिकी हुई हैं।

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