दमोह। मध्य प्रदेश सरकार जहां एक ओर आम नागरिकों की सहूलियत के लिए सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने का दावा कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। खुद मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों और आला अफसरों के आदेशों को धता बताते हुए ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक के मुलाजिम अपनी मनमानी पर उतारू हैं। इसका सबसे ताजा और चौंकाने वाला उदाहरण दमोह जिले में उस वक्त देखने को मिला, जब जिला कलेक्टर खुद सुबह-सुबह औचक निरीक्षण पर निकल पड़े।
कुर्सियां खाली, साहब गायब; चिलचिलाती धूप में भटकती रही जनता
दरअसल, जिला मुख्यालय के शासकीय कार्यालयों को लेकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को लगातार लापरवाही और लेटलतीफी की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए जब वे बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक एसडीएम कार्यालय, दमोह तहसील, दमयंतीनगर तहसील और जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था। दफ्तर खुलने के घंटों बाद भी न तो संबंधित विभागों के 'साहब' अपनी कुर्सियों पर मौजूद थे और न ही उनके अधीन काम करने वाले बाबू और कर्मचारी। दूसरी तरफ, दूर-दराज के गांवों से सुबह से आए गरीब ग्रामीण और आम लोग इस भीषण गर्मी में परेशान होकर अधिकारियों का इंतजार कर रहे थे।
कलेक्टर ने खुद बनाई वीडियो; फील्ड विजिट का दावा भी निकला झूठा
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जब गायब अधिकारियों के बारे में पूछताछ की और उनके मूवमेंट रजिस्टर की जांच की, तो पता चला कि जिम्मेदार अफसर न तो दफ्तर में हैं और न ही किसी सरकारी फील्ड विजिट (क्षेत्रीय दौरे) पर गए थे। दफ्तरों की इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मौके की जमीनी हकीकत को स्वयं अपने मोबाइल कैमरे में कैद करवाया। इसके बाद जब वे जनपद पंचायत कार्यालय के निरीक्षण के लिए आगे बढ़े, तो वहां भी प्रशासनिक अमला इसी तरह नदारद और सुस्त मिला।
एसडीएम और तहसीलदारों समेत 24 को कारण बताओ नोटिस; 3 दिन में मांगा जवाब
दफ्तरों में पसरी इस अव्यवस्था को देखकर कलेक्टर ने मौके पर ही कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में अनुविभागीय अधिकारी (SDM), दो तहसीलदारों और विभिन्न विभागों के कुल 24 कर्मचारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी करने के आदेश दे दिए। इन सभी से तीन दिनों के भीतर इस लापरवाही का स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके साथ ही, बिना सूचना गायब रहने वाले इन सभी अधिकारी-कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने (नो वर्क, नो पे) के भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
अधिकारियों में मचा हड़कंप; लापरवाही पर मिलेगी सीधी सजा
दमोह जिले के प्रशासनिक इतिहास में लंबे समय बाद किसी कलेक्टर द्वारा सीधे एसडीएम और तहसीलदार स्तर के राजपत्रित अधिकारियों पर इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जिससे पूरे जिले के महकमे में खलबली मच गई है। कलेक्टर ने कड़े लहजे में सभी मातहतों को चेतावनी देते हुए कहा है कि जनता के कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में भी आम नागरिकों को परेशान होना पड़ा, तो संबंधित अधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और उनके खिलाफ इससे भी ज्यादा कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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