टोंक। राजस्थान के टोंक में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए निवाई स्थित डॉ. के.एन. मोदी विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. मीनू गंगल और उनके सहयोगी असिस्टेंट प्रोफेसर रमेश चंद मीणा को ₹20,000 की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। एसीबी के महानिदेशक (DG) गोविंद गुप्ता ने बताया कि ब्यूरो की टोंक इकाई को इस संबंध में एक पीड़ित छात्र द्वारा गोपनीय शिकायत दी गई थी, जिसके बाद इस पूरे जाल को बिछाकर दोनों को गिरफ्तार किया गया।
परीक्षा में बैठने और एडमिट कार्ड जारी करने के नाम पर मांगी थी घूस
शिकायतकर्ता छात्र डॉ. के.एन. मोदी यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सत्र 2024-26 के तहत दो वर्षीय बीएड (B.Ed) कोर्स की पढ़ाई कर रहा है। छात्र का आरोप था कि कॉलेज में उसकी कम हाजिरी (शॉर्ट अटेंडेंस) को ठीक करने, मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने और उसका एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) जारी करने के एवज में दोनों प्राध्यापक उससे ₹23,000 की रिश्वत की मांग कर रहे थे। एसीबी ने जब गोपनीय तरीके से इस शिकायत का सत्यापन कराया, तो आरोप पूरी तरह सही पाए गए। इसके बाद आरोपियों ने छात्र को गुरुवार को पैसे लेकर बुलाया था और काम करने का आश्वासन दिया था।
कार्यालय में बैठकर लिए पैसे; पेंट की जेब से बरामद हुई रिश्वत की राशि
अजमेर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक नारायण टोगस के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ऋषिकेश मीणा की अगुवाई में भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने विश्वविद्यालय परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही छात्र पैसे लेकर पहुंचा, एचओडी डॉ. मीनू गंगल ने अपने दफ्तर में मौजूद सहायक प्रोफेसर रमेश चंद मीणा को रकम थमाने का इशारा किया। रमेश चंद ने छात्र से ₹20,000 की नकदी ली, उसे गिना और अपनी पेंट की जेब में रख लिया। इसी दौरान इशारा मिलते ही पहले से मुस्तैद एसीबी की टीम ने दबिश देकर रमेश चंद मीणा की जेब से रिश्वत के पैसे बरामद कर दोनों को हिरासत में ले लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज, जांच और पूछताछ जारी
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्मिता श्रीवास्तव की देखरेख में पकड़े गए दोनों प्राध्यापकों से गहन पूछताछ की जा रही है। ब्यूरो ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसीबी की टीमें अब आरोपियों के ठिकानों और उनके अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड्स को भी खंगाल रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्होंने पहले भी अन्य छात्रों को इस तरह से प्रताड़ित कर अवैध वसूली की है।
दत्तवास थाने के एएसआई को भी ₹25 हजार लेते दबोच चुकी है एसीबी
टोंक जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी का यह कोई पहला बड़ा एक्शन नहीं है। इससे पहले, इसी महीने 8 मई को भी ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के दत्तवास थाने में तैनात सहायक उप निरीक्षक (ASI) गणेश नारायण चौधरी को ₹25,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उक्त पुलिसकर्मी एक मुकदमे में शिकायतकर्ता को रियायत देने और उसका जब्त किया गया मोबाइल फोन वापस लौटाने के नाम पर घूस ले रहा था, जिसे एसीबी ने रंगे हाथों दबोचा था।

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