103 नोजल सीज, राजस्थान के पंपों पर चोरी की जांच तेज

जयपुर। राजस्थान में पेट्रोल-डीजल भरवाने वाले वाहन चालकों के लिए चौंकाने वाली खबर है। मशीन की स्क्रीन पर 'ज़ीरो' देखकर तेल डलवाने के बावजूद ग्राहकों को पूरा ईंधन नहीं मिल रहा था। प्रदेश के उपभोक्ता मामले विभाग ने तेल के इस काले खेल को उजागर करने के लिए 5 मई से 18 मई 2026 तक एक बड़ा औचक निरीक्षण अभियान चलाया। विभाग की 23 विशेष टीमों ने राज्य के 20 जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसके बाद पूरे प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों में खलबली मच गई है।

प्रति 5 लीटर पर 120 ML तक की चोरी, जनता को लग रही लाखों की चपत

उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि जांच के दौरान कई नामी पेट्रोल पंपों पर नोजल की पैमाइश में भारी गड़बड़ी मिली। यहाँ प्रति 5 लीटर ईंधन की बिक्री पर 30 मिलीलीटर से लेकर 120 मिलीलीटर तक कम तेल दिया जा रहा था। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार, इस शॉर्ट डिलीवरी (कम नाप-तौल) के कारण डिफ़ॉल्टर पंपों से उपभोक्ताओं को हर दिन लगभग 211 लीटर तेल कम मिल रहा था। रुपये के लिहाज से देखें तो जनता की जेब से रोजाना करीब ₹21,100 और महीने भर में करीब ₹6,35,700 की गाढ़ी कमाई बिना गाड़ी की टंकी में गए ही चोरी हो रही थी।

110 पेट्रोल पंप पाए गए दोषी, जयपुर-नागौैर-बाड़मेर में बड़ी कार्रवाई

इस महा-अभियान के दौरान कुल 110 पेट्रोल पंप विधिक मापविज्ञान अधिनियम के उल्लंघन के दोषी पाए गए, जिनसे मौके पर ही ₹2,21,500 का नकद जुर्माना वसूला गया। तेल कम देने के मामलों में ही ₹1,53,000 की पेनल्टी शामिल है।

20 जिलों में सीज किए गए नोजल की विस्तृत रिपोर्ट:

जिले का नाम कार्रवाई के दायरे में आए पंप सीज किए गए नोजल्स की संख्या
जयपुर 3 12
नागौैर 4 11
बाड़मेर 6 10
सिरोही 7 9
दौसा 2 7
भरतपुर 4 6
अलवर, जोधपुर, पाली प्रत्येक जिले में 2 से 4 पंप प्रत्येक जिले में 5 नोजल
सीकर, अजमेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर प्रत्येक जिले में 1 से 4 पंप प्रत्येक जिले में 4 नोजल
बीकानेर, कोटा, उदयपुर, डूंगरपुर प्रत्येक जिले में 1 से 3 पंप प्रत्येक जिले में 3 नोजल
झालावाड़, झुंझुनू प्रत्येक जिले में 2 पंप प्रत्येक जिले में 2 नोजल
सवाई माधोपुर 1 1

नियमों की उड़ी धज्जियां: न टेस्टिंग कैन मिला और न ही सर्टिफिकेट

इस छापेमारी में केवल तेल की चोरी ही नहीं पकड़ी गई, बल्कि 72 अन्य पेट्रोल पंपों पर विधिक नियमों की खुलेआम अवहेलना होती मिली, जिन पर अलग से ₹68,500 का जुर्माना लगाया गया। इन आउटलेट्स पर मुख्य रूप से दो बड़ी फ्रॉड और लापरवाहियां सामने आईं:

  • अन-सत्यापित 5 लीटर माप पात्र: हर पंप पर सरकार द्वारा प्रमाणित 5 लीटर का विशेष मेटल कैन होना जरूरी है ताकि ग्राहक खुद नाप चेक कर सकें, लेकिन कई जगह यह अन-सत्यापित था।

  • सत्यापन प्रमाण पत्र का गायब होना: मशीनों के समय पर हुए कैलिब्रेशन का सरकारी सर्टिफिकेट डिस्प्ले बोर्ड पर लगाना अनिवार्य है, जिसे इन संचालकों ने छुपा रखा था।

सरकार की एडवाइजरी: शक होने पर तुरंत करें लाइव टेस्टिंग का इस्तेमाल

विभागीय मंत्री सुमित गोदारा ने जनता को जागरूक करते हुए कहा कि केवल सरकारी डंडे से यह चोरी नहीं रुक सकती, इसके लिए उपभोक्ताओं का सतर्क होना जरूरी है। सरकार ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी भी ग्राहक को तेल की मात्रा पर संदेह हो, तो यह उनका कानूनी अधिकार है कि वे पंप मैनेजर से 5 लीटर के प्रमाणित माप पात्र से लाइव टेस्टिंग करने को कहें। यदि कोई संचालक इससे इनकार करता है, तो तुरंत इसकी शिकायत जिला रसद कार्यालय या विभागीय हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराएं। सरकार ने साफ किया है कि जनता की जेब पर डाका डालने वालों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।