नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास के बाहर पुतला फूंकने के मामले में आरोपियों को किसी भी तरह की राहत देने से साफ मना कर दिया है। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि लोकतंत्र के भीतर विरोध जताने के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत ने कार्रवाई को बताया 'बेहद विघटनकारी'
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने आरोपियों की इस हरकत पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने जगदीप सिंह उर्फ जग्गा और अन्य आरोपियों की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि उनकी यह हरकत एक सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक बेहद विघटनकारी गतिविधि थी, जिससे कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
सुरक्षा घेरा तोड़कर जलते हुए हिस्से फेंकने का आरोप
अदालत ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि आरोपियों ने न केवल सड़क पर पुतला जलाया, बल्कि सुरक्षाकर्मियों के रोकने के बावजूद कानून अपने हाथ में लिया। आरोपी जबरन सड़क, फुटपाथ और सर्विस लेन को पार करते हुए आगे बढ़े और उन्होंने पुतले के जलते हुए हिस्सों को सुरक्षा कक्ष (सिक्योरिटी केबिन) की छत पर फेंक दिया।
'यह विरोध प्रदर्शन नहीं, कानून का उल्लंघन है'
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी और विरोध करने के अधिकार की भी एक सीमा होती है। सुरक्षाकर्मियों और सरकारी संपत्ति को जोखिम में डालने वाली इस तरह की हिंसक और उग्र हरकत को किसी भी नजरिए से जायज 'विरोध प्रदर्शन' का नाम नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखने का फैसला सुनाया।

More Stories
जनता की सच्ची निगरानी: मोबाइल छीनने वाला बदमाश धर दबोचा गया
कमरे में बांधकर बेल्ट-केबल से पीटा, पैसे मांगने पर रिश्तेदारों का अत्याचार
ड्यूटी पर आई महिला की मौत, कॉलेज परिसर में मिला शव