जयपुर। राजस्थान के आम नागरिकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर है। प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल आया है। महज चार दिनों के भीतर ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है, जिसने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। राजधानी जयपुर समेत राज्य के तमाम जिलों में मंगलवार सुबह से ही पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा तय की गई नई दरें प्रभावी हो गई हैं।
चार दिन में ₹4 से ज्यादा महंगा हुआ ईंधन, ऑल-टाइम हाई की ओर कदम
इससे पहले बीते 15 मई को भी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में तगड़ा इजाफा किया था। उस दौरान पेट्रोल पर 3.25 रुपये और डीजल पर 3.02 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। मंगलवार के ताजा उछाल को मिला लिया जाए, तो पिछले केवल चार दिनों के भीतर ही राजस्थान में पेट्रोल कुल 4.19 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3.91 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। इस लगातार हो रही बढ़ोतरी से वाहन मालिकों, कैब ऑपरेटर्स और मालवाहक ट्रांसपोर्टरों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ने लगा है।
मालभाड़ा बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ने के आसार, चौतरफा महंगाई की आशंका
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन के दामों में इस तरह लगातार हो रहे बैक-टू-बैक इजाफे का सीधा असर देश और राज्य की सप्लाई चेन पर पड़ेगा। जब परिवहन लागत (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) बढ़ेगी, तो उसका सीधा असर फल, हरी सब्जियां, दूध, राशन और रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले अन्य उपभोक्ता सामानों पर दिखना तय है। मालभाड़े में बढ़ोतरी के कारण आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में जरूरी चीजों के भाव और बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ और गहरा जाएगा।
दाम बढ़ने की दहशत (पैनिक) से बाजार में बढ़ी तेल की मांग
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव के कारण उपभोक्ताओं के बीच एक अजीब सी अफरा-तफरी और दहशत (पैनिक सिचुएशन) का माहौल बन गया है। लोगों को लग रहा है कि आने वाले दिनों में कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं, जिसके चलते तेल की एडवांस बुकिंग और खरीदारी बढ़ गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जयपुर शहर में इस पैनिक बाइंग की वजह से 1 मई से 14 मई के बीच पेट्रोल की मांग में 25% और डीजल की खपत में 36% तक का अप्रत्याशित उछाल देखा गया है।
भीषण गर्मी और लचर पब्लिक ट्रांसपोर्ट ने बढ़ाई मजबूरी
राजस्थान इस समय रिकॉर्ड तोड़ और भीषण गर्मी की चपेट में है। कड़कती धूप और लू के थपेड़ों से बचने के लिए लोग दुपहिया वाहनों के बजाय कारों या अन्य चौपहिया वाहनों का प्रयोग करने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी तरफ, जयपुर जैसे महानगर में सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) के पर्याप्त साधन और मुस्तैद व्यवस्था न होने के कारण नौकरीपेशा और आम नागरिकों को अपने निजी वाहनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में महंगे पेट्रोल-डीजल को खरीदना अब जनता की मजबूरी बन चुका है, जिसका असर अब हर क्षेत्र में साफ दिखने लगा है।

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