नई दिल्ली। दिल्ली के बहुचर्चित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सीबीआई ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को दी गई राहत को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हालांकि, आज हुई सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की तरफ से कोई भी कानूनी प्रतिनिधि या वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई आगामी सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी है। गौरतलब है कि पहले यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के पास था, जहां से इसे इस वर्तमान पीठ में स्थानांतरित किया गया है।
सॉलिसिटर जनरल की दलील- 'आरोपियों को है केस की पूरी जानकारी'
सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने नोट किया कि मुख्य आरोपियों की तरफ से कोर्ट में कोई भी वकील मौजूद नहीं है। इस पर जांच एजेंसी की ओर से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि गत 9 मार्च को जारी किए गए नोटिस सभी संबंधित पक्षों को तामील कराए जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी आरोपियों को अदालत की इस कार्यवाही की पूरी और स्पष्ट जानकारी है। तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष जोर देकर कहा कि यह देश की राजधानी में हुए एक बेहद गंभीर घोटाले से जुड़ा विषय है। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट पेश की गई थी और जब निचली अदालत में आरोप तय करने पर बहस चल रही थी, तब इन सभी पक्षों ने काफी लंबी दलीलें पेश की थीं। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया मौजूदा आदेश न्यायिक समीक्षा के मानदंडों पर खरा नहीं उतर सकता।
सह-आरोपी विजय नायर के वकील ने उठाया सीबीआई की याचिका पर सवाल
इसी दौरान मामले के एक अन्य सह-आरोपी विजय नायर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने तकनीकी आधार पर सीबीआई की इस पुनर्विचार याचिका की वैधता (मेंटेनेबिलिटी) पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दलील दी कि यह याचिका एक निजी वकील के माध्यम से कोर्ट में दाखिल की गई है, इसलिए मुख्य मामले में आगे बढ़ने से पहले इस बात की कानूनी वैधता पर फैसला होना चाहिए। इस दलील का जवाब देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती बेंच ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि इस केस से जुड़े सभी तकनीकी और मुख्य बिंदुओं पर एक साथ ही सुनवाई की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष को यह याचिका दायर करने का पूर्ण वैधानिक अधिकार है और इस विषय पर पहले भी अदालती आदेश आ चुके हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी- 'अदालती कार्यवाही को जॉय राइड नहीं समझ सकते'
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट से कहा कि कोई भी व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया और अदालत की इस कार्यवाही को हल्के में या किसी 'जॉय राइड' (मनोरंजन की सवारी) की तरह नहीं ले सकता कि जब मर्जी हो तब आए और जब मर्जी हो गायब रहे। हालांकि, अदालत ने इस पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि चूंकि यह मामला एक बेंच से दूसरी बेंच में ट्रांसफर होकर आया है और यह लगातार मीडिया व समाचारों की सुर्खियों में बना हुआ है, इसलिए यह माना जा सकता है कि संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी जरूर होगी।
सोमवार तक के लिए टली सुनवाई, सभी पक्षों की मौजूदगी अनिवार्य
न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने अंत में टिप्पणी की कि न्याय का तकाजा और एक आदर्श स्थिति यही कहती है कि मामले से जुड़े सभी पक्ष अदालत में मौजूद रहें। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका देने के बाद ही आगे की बहस का शेड्यूल तय किया जाना उचित होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि वे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को औपचारिक रूप से यह सूचित करें कि अब उनका यह मामला इस नई बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हो चुका है। इसके बाद हाई कोर्ट ने सोमवार तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।

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