जनसुनवाई में CM भजनलाल का कड़ा संदेश, अफसरों को चेतावनी

जयपुर/कोटा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर प्रदेश स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन किया। इस दौरान राज्य के कोने-कोने से पहुंचे आम नागरिकों ने शिक्षा, पेयजल, राजस्व, सामाजिक न्याय और नगरीय विकास से जुड़ी अपनी शिकायतें मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कई गंभीर मामलों में मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। राहत के इसी क्रम में नागौर से आए एक दिव्यांग व्यक्ति को तुरंत इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल देने और करौली के एक छात्र को उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति जारी करने के आदेश दिए गए। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र को चेताते हुए कहा कि आम जनता को अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर न किया जाए, और जनसमस्याओं के निस्तारण में ढिलाई बरतने वाले अफसरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा।

समय सीमा में हो शिकायतों का निपटारा, लापरवाही पर गिरेगी गाज

जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों ने अपनी फरियादें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाईं। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों द्वारा लाए गए कुछ जन-जागरूकता पोस्टरों का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री शर्मा ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि जनसुनवाई में आने वाले हर एक मामले की नियमित रूप से ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन की हर शिकायत का समाधान एक निश्चित समय सीमा के भीतर होना चाहिए, ताकि जनता का शासन और प्रशासन पर भरोसा और मजबूत हो सके।

शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में शिक्षकों का हुंकार; छुट्टियों में कटौती के खिलाफ खोला मोर्चा

दूसरी ओर, कोटा जिले के रामगंजमंडी (जो कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का विधानसभा क्षेत्र है) में सोमवार को भारी प्रशासनिक और सियासी हलचल देखी गई। शिविरा पंचांग सत्र 2026-27 में स्कूली छुट्टियों में की गई कटौती से नाराज शिक्षकों ने राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के नेतृत्व में एक विशाल विरोध रैली निकाली। लगभग चार से पांच किलोमीटर लंबे इस मार्च को पूरा करने में शिक्षकों को दो से ढाई घंटे का समय लगा। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाद में उप जिला कलक्टर (एसडीएम) को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

वेतन विसंगति दूर करने और पारदर्शी स्थानांतरण नीति की मांग पर अड़े शिक्षक

ज्ञापन के माध्यम से शिक्षक संगठन ने न केवल अवकाश कटौती के फैसले को वापस लेने की मांग की, बल्कि कई अन्य बुनियादी मुद्दों को भी सरकार के सामने पुरजोर तरीके से उठाया। शिक्षकों की मुख्य मांगों में सरकारी स्कूल के भवनों की सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से सुरक्षा जांच कराने, सातवें वेतनमान की कमियों को दूर करने और शिक्षकों के तबादलों के लिए एक स्थायी व पारदर्शी नीति बनाने की मांग शामिल रही। इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल रखने और लंबे समय से बकाया भत्तों के भुगतान की मांग भी उठाई गई।

मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के समापन पर आयोजित एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए संगठन के मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा, सभाध्यक्ष ललित आर. पाटीदार और प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा समेत कई वरिष्ठ शिक्षक नेताओं ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज राष्ट्र निर्माता है और उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शिक्षक नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।