नई दिल्ली: देश में आम जनता पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ बढ़ गया है क्योंकि पंद्रह मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे तीन रुपये प्रति लीटर का तगड़ा इजाफा कर दिया गया है। आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली करने वाली इस मूल्य वृद्धि के बाद भी तेल संकट के और गहराने तथा कीमतों में आगामी दिनों में और अधिक बढ़ोतरी होने की प्रबल आशंका बनी हुई है। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां इस ताजा बढ़ोतरी से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को देखते हुए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
वैश्विक बाजार के दबाव और बढ़ती लागत के बीच मामूली राहत
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के निदेशक अरविंद कुमार ने इस मूल्य वृद्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और रिफाइनिंग लागत को देखते हुए तीन रुपये की यह बढ़ोतरी बेहद मामूली है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की जो वास्तविक लागत बढ़ी है, उसकी पूरी भरपाई करने के लिए कीमतों में इससे कहीं ज्यादा इजाफा करने की आवश्यकता थी। वर्तमान में की गई यह वृद्धि बढ़ी हुई लागत का महज दस प्रतिशत यानी केवल दसवां हिस्सा ही है, जिसका सीधा मतलब है कि तेल कंपनियों ने अभी भी घाटे का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करते हुए जनता पर न्यूनतम बोझ डाला है।
ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए रिफाइनरियों पर भारी दबाव
घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की किल्लत न हो और सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की निर्बाध सप्लाई लगातार बनी रहे, इसके लिए देश की तेल रिफाइनरियां इस समय अपनी तय सीमा से कहीं ज्यादा दबाव में काम कर रही हैं। रिफाइनिंग क्षेत्र के उच्चाधिकारियों के अनुसार देश में ईंधन की मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए सभी रिफाइनिंग इकाइयां अपनी शत-प्रतिशत क्षमता से भी अधिक पर संचालित की जा रही हैं। कंपनियां भारी आर्थिक दबाव और कच्चे तेल के ऊंचे दामों के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं।
भविष्य में और अधिक मूल्य वृद्धि की मंडराती आशंका
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे बेतहाशा उछाल के कारण घरेलू तेल कंपनियों के मुनाफे और कार्यशील पूंजी पर विपरीत असर पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों और न्यूज एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव या अन्य कारणों से कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में तेल विपणन कंपनियां अपने वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए खुदरा कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव कर सकती हैं। इस स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वर्तमान में दी गई तीन रुपये की राहत अस्थाई साबित हो सकती है और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को ईंधन के लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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