बीजिंग: अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर जारी तल्खी एक बार फिर विश्व पटल पर खुलकर सामने आ गई है। बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान सीधी चेतावनी दी है। जिनपिंग ने दोटूक शब्दों में कहा कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में सबसे अहम और संवेदनशील कड़ी है; यदि इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के बीच सीधा टकराव या युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 2017 के बाद ट्रंप का यह पहला चीन दौरा है, जिसे वैश्विक राजनीति में 'हाई-स्टेक समिट' के तौर पर देखा जा रहा है।
बंद कमरे में हुई गंभीर चर्चा और 'चार लाल रेखाएं'
चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच करीब दो घंटे तक चली गोपनीय बातचीत में जिनपिंग ने ताइवान को लेकर चीन की कड़ाई को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ताइवान का सवाल ही वह आधार है जिस पर दोनों देशों के संबंधों की स्थिरता टिकी है। इससे पहले चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर चीन की 'चार लाल रेखाओं' का जिक्र कर अमेरिका को पहले ही आगाह कर दिया था। इन रेखाओं में ताइवान का सवाल, चीन की राजनीतिक व्यवस्था, मानवाधिकार और विकास का अधिकार शामिल हैं। चीन ने साफ किया है कि इन मुद्दों पर किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप या दबाव स्वीकार्य नहीं होगा।
ट्रंप की कूटनीति और 'थुसीडाइड्स ट्रैप' का जिक्र
एक ओर जहां जिनपिंग का लहजा सख्त रहा, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने व्यक्तिगत स्तर पर गर्मजोशी दिखाने की कोशिश की। ट्रंप ने जिनपिंग को 'एक महान नेता' और 'पुराना मित्र' बताते हुए कहा कि वे 2026 को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक साल बनाना चाहते हैं। हालांकि, जिनपिंग ने उन्हें 'थुसीडाइड्स ट्रैप' (Thucydides Trap) के खतरे से आगाह किया—यह एक ऐसा सिद्धांत है जो कहता है कि जब एक उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो युद्ध की संभावना प्रबल हो जाती है। जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार बनना चाहिए।
गार्ड ऑफ ऑनर और प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी
ट्रंप के स्वागत के लिए बीजिंग में भव्य आयोजन किया गया, जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ऑनर गार्ड बटालियन ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस अहम बैठक में ट्रंप के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जैसे शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे। वार्ता में केवल ताइवान ही नहीं, बल्कि ईरान युद्ध के कारण उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट, व्यापार टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे जटिल मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, ट्रंप की इस यात्रा को प्रतीकात्मक रूप से सफल माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान पर चीन की यह चेतावनी आने वाले दिनों में वाशिंगटन की विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

More Stories
इजरायल-UAE की कथित गुप्त बैठक पर मचा विवाद, राजनीतिक हलकों में हलचल
डीएनए रिपोर्ट ने खोला राज: जुड़वा बहनों के अलग-अलग पिता
क्या पाकिस्तान ने अमेरिकी हमले के डर से ईरानी विमानों को दी पनाह?