भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज, 3 मई 2026 को मध्य प्रदेश के औद्योगिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहे हैं। इंदौर और पीथमपुर के बीच 2360 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' का भूमि-पूजन मालवा अंचल के लिए प्रगति का नया मार्ग खोलेगा।
यहाँ इस मेगा प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं और भविष्य की झलक दी गई है:
प्रोजेक्ट की रूपरेखा: एक नजर में
यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक सुनियोजित औद्योगिक नेटवर्क है जो मध्य प्रदेश को निवेश के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।
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लंबाई और चौड़ाई: 20.28 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर 8-लेन चौड़ा होगा।
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क्षेत्रफल: लगभग 1316 हेक्टेयर (3200 एकड़) भूमि पर नियोजित विकास।
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कनेक्टिविटी: यह मार्ग इंदौर एयरपोर्ट के पास सुपर कॉरिडोर से शुरू होकर सीधे पीथमपुर के ए.बी. रोड (NH-47 और NH-52) को जोड़ेगा।
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बफर ज़ोन: 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क के दोनों ओर बफर ज़ोन बनाया जाएगा, जो भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को सुरक्षित रखेगा।
मालवा की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस कॉरिडोर के निर्माण से इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र एक लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में परिवर्तित हो जाएगा:
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रोजगार के नए अवसर: हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन होगा, जिससे स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर लाभ मिलेगा।
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निवेशकों का आकर्षण: बेहतर कनेक्टिविटी और कम लॉजिस्टिक्स लागत के कारण ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियां यहाँ आकर्षित होंगी।
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MSME को मजबूती: छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़े कारखानों के साथ जुड़कर काम करने का सुव्यवस्थित वातावरण मिलेगा।
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आईटी और फिनटेक हब: यह कॉरिडोर इंदौर को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और फिनटेक के क्षेत्र में देश के अग्रणी शहरों की कतार में खड़ा करेगा।
औद्योगिक एकीकरण (Integrated Connectivity)
यह प्रोजेक्ट प्रदेश के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों को एक धागे में पिरोएगा:
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पीथमपुर निवेश क्षेत्र
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मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क
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पीएम मित्र पार्क (टेक्सटाइल)
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विक्रम उद्योगपुरी (उज्जैन)
निष्कर्ष: उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास में यह कॉरिडोर एक 'रीढ़ की हड्डी' साबित होगा। परिवहन के समय में बचत और सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ने से मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी औद्योगिक केंद्र बनकर उभरेगा।

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