मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी अटकलों का अंत हो गया है। प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और विदर्भ के 'फायरब्रांड' नेता बच्चू कडू ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शिंदे ने कडू का पार्टी में स्वागत किया और उनके शामिल होते ही उन्हें आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
15-20 साल का 'वफादारी' संकल्प और शर्तों पर सहमति
शिवसेना में शामिल होने के बाद बच्चू कडू ने अपनी 'घर वापसी' पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, "मेरी राजनीति की शुरुआत शिवसेना से ही हुई थी और अब बाकी बची 15-20 साल की राजनीतिक यात्रा भी शिवसेना के साथ ही पूरी होगी।" कडू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सत्ता के लिए नहीं, बल्कि किसानों और दिव्यांगों के मुद्दों पर अपनी शर्तें मनवाने के बाद यह फैसला लिया है।
प्रमुख शर्तें जिन पर बनी सहमति:
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किसानों की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में सुधार।
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विधवा महिलाओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी बनाना।
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दिव्यांग मंत्रालय को और अधिक सशक्त और बजट संपन्न बनाना।
प्रहार संगठन का भविष्य: सामाजिक कार्य और राजनीति का बंटवारा
प्रहार जनशक्ति पार्टी के भविष्य पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए बच्चू कडू ने कहा कि 'प्रहार' का अस्तित्व खत्म नहीं होगा। उन्होंने एक नई कार्ययोजना साझा की:
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सामाजिक शाखा: दिव्यांगों और जरूरतमंदों के लिए काम करने वाला प्रहार संगठन का सामाजिक ढांचा पहले की तरह सक्रिय रहेगा।
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राजनीतिक शाखा: जो कार्यकर्ता सक्रिय राजनीति करना चाहते हैं, वे अब शिवसेना के झंडे तले काम करेंगे।
पुरानी विदाई और नई शुरुआत: विदर्भ में बदलेगा समीकरण
बच्चू कडू ने याद दिलाया कि उन्होंने पहले किसानों के मुद्दों (विशेषकर कपास के दाम) पर असहमति के कारण शिवसेना छोड़ी थी। अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा इन मुद्दों पर ठोस आश्वासन मिलने के बाद उनकी वापसी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बच्चू कडू के आने से विदर्भ क्षेत्र में शिवसेना (शिंदे गुट) की स्थिति काफी मजबूत होगी। किसानों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच कडू की गहरी पकड़ का फायदा आगामी चुनावों में महायुति गठबंधन को मिल सकता है।

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