अहमदाबाद: गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने एक बार फिर राज्य में भाजपा के अभेद्य दुर्ग की पुष्टि कर दी है। प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघाणी ने इन परिणामों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन पर जनता की 'अटूट मुहर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के भ्रामक प्रचार और नकारात्मक राजनीति को गुजरात की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है।
1. महानगर से तालुका तक भाजपा का दबदबा
मंत्री जीतू वाघाणी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने सभी स्तरों पर ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। पार्टी ने महानगरपालिकाओं में 89.75% सीटों पर कब्जा कर विपक्ष को हाशिए पर धकेल दिया है। जिला पंचायतों में 81.83%, नगरपालिकाओं में 75.76% और तालुका पंचायतों में 70.19% सीटों के साथ भाजपा का कुल जीत प्रतिशत 74.96% रहा। मंत्री ने विश्वास जताया कि यह जीत 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत नींव साबित होगी।
2. सामाजिक समरसता और 'सबका साथ-सबका विकास'
भावनगर महानगरपालिका का उदाहरण देते हुए मंत्री ने बताया कि भाजपा को समाज के हर वर्ग—कोली, क्षत्रिय, दलित, पटेल, ब्राह्मण, मालधारी और सिंधी—का व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि जहाँ कांग्रेस जाति आधारित राजनीति में उलझी रही, वहीं भाजपा के उम्मीदवारों को हर जाति ने 'विकास' के नाम पर चुना। पटेल, ब्राह्मण, माली और कड़िया राजपूत समाज में भाजपा ने 100% सफलता दर हासिल की, जो सामाजिक एकजुटता का प्रमाण है।
3. विपक्ष पर प्रहार: 'अस्तित्व बचाने की लड़ाई'
विपक्ष की तीखी आलोचना करते हुए वाघाणी ने कहा कि चुनाव के दौरान अभद्र भाषा और राज्य को बदनाम करने वाले मुद्दों का प्रयोग गुजरात की संस्कृति के विपरीत था। उन्होंने कहा कि हार के बाद भी विपक्ष वोट शेयर बढ़ने के झूठे दावे कर रहा है, जबकि हकीकत में वे अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मंत्री ने विपक्ष को सलाह दी कि वे हार स्वीकार कर रचनात्मक भूमिका निभाना सीखें।

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