गांधीनगर: स्थानीय निकाय चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने 'सेवा और सुशासन' की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह भारी जनादेश केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा की नैतिक जिम्मेदारी है। अब सरकार का पूरा ध्यान जमीनी स्तर पर लंबित शिकायतों के त्वरित निपटारे पर केंद्रित होगा।
1. मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश: ग्राम से राज्य स्तर तक होगा निवारण
प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघाणी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय करने के विशेष निर्देश दिए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान जनसंपर्क में सामने आए स्थानीय मुद्दों और प्रशासनिक शिकायतों को सूचीबद्ध किया गया है। अब एक ठोस 'एक्शन प्लान' के तहत इन सभी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
2. 'विश्वास' के बदले 'पारदर्शी प्रशासन' का वादा
सरकार ने यह संकल्प दोहराया है कि जनता ने जो अटूट विश्वास भाजपा पर जताया है, उसके बदले में नागरिकों को अधिक पारदर्शी और सुविधायुक्त प्रशासन दिया जाएगा। मंत्री वाघाणी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र के इस उत्सव (चुनाव) के बाद अब समय केवल और केवल जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का है।
3. विजय के उत्साह को सेवा में बदलने की रणनीति
बैठक में यह तय हुआ कि आने वाले दिनों में राज्य के हर कोने में विकास कार्यों को और अधिक गति दी जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि छोटी से छोटी समस्या का भी संज्ञान लिया जाए, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुँच सके। सरकार का लक्ष्य अपनी चुनावी सफलता के उत्साह को जनसेवा के रूप में धरातल पर उतारना है।

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