होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया सोशल मीडिया पोस्ट अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अप्रैल 2026 के ताजा घटनाक्रम के अनुसार, ट्रंप ने न केवल इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अमेरिकी नाकेबंदी को सख्त करने के संकेत दिए हैं, बल्कि इसे सांकेतिक रूप से 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' (Strait of Trump) का नाम भी दे दिया है।
इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
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'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' का विवाद: हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक यूजर ने होर्मुज स्ट्रेट का नक्शा साझा करते हुए इसे 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' लिखा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पोस्ट को री-शेयर करते हुए अपनी सहमति दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य और आर्थिक तनातनी चरम पर है।
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पुरानी टिप्पणी और 'फर्जी न्यूज़' का तंज: ट्रंप ने पिछले महीने (मार्च 2026) मियामी में आयोजित 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) प्रायोरिटी समिट' के दौरान भी अनजाने में होर्मुज को 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कह दिया था। बाद में उन्होंने मज़ाकिया लहजे में इसे सुधारते हुए कहा कि मीडिया इसे उनकी "गलती" बताएगा, जबकि उनके मुताबिक उनसे गलतियां बहुत कम होती हैं।
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नाकेबंदी पर सख्त रुख: ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों और होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान एक नए "परमाणु समझौते" (Non-nuclear deal) पर हस्ताक्षर नहीं कर देता। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह आर्थिक घेराबंदी बमबारी से अधिक प्रभावी है क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था "पतन की स्थिति" (State of collapse) में पहुँच गई है।
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वैश्विक प्रभाव: इस नाकेबंदी के कारण दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा प्रभावित हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जिससे भारत और यूरोप जैसे तेल आयातक देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
ईरान ने इस नाकेबंदी को "समुद्री डकैती" करार दिया है और बदले में खुद भी इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है। ट्रंप का मानना है कि समय ईरान के पक्ष में नहीं है और वे "अधिकतम दबाव" की नीति के जरिए तेहरान को अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर कर देंगे।

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