नई दिल्ली: दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को चार पृष्ठों का एक पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे अब इस अदालत की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेंगे। केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि न तो वे स्वयं पेश होंगे और न ही उनका कोई प्रतिनिधि वहां दलीलें पेश करेगा।
"न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए"
केजरीवाल ने अपने पत्र में लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों का हवाला देते हुए लिखा कि न्याय की प्रक्रिया केवल निष्पक्ष होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि जनता की नजरों में वह निष्पक्ष दिखनी भी चाहिए। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस विशेष अदालत से न्याय की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
पत्र की मुख्य बातें और आपत्तियां
केजरीवाल ने अपने इस कड़े फैसले के पीछे कई तर्क दिए हैं:
-
पिछली याचिका का संदर्भ: केजरीवाल ने कहा कि जब उन्होंने पहले जज से मामले से हटने (Recusal) का अनुरोध किया था, तो उसे एक 'व्यक्तिगत हमले' के रूप में लिया गया। उनके अनुसार, उनकी चिंताओं को सही परिप्रेक्ष्य में नहीं समझा गया।
-
गांधीवादी दृष्टिकोण: उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न्यायपालिका का अपमान करना नहीं, बल्कि उसे और सशक्त बनाना है।
-
कानूनी नुकसान की परवाह नहीं: मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि इस बहिष्कार से उनके कानूनी पक्ष को क्षति पहुँच सकती है, लेकिन उन्होंने इसे अपनी 'अंतरात्मा की आवाज' बताते हुए स्वीकार कर लिया है।
अगला कदम: सुप्रीम कोर्ट का विकल्प खुला
हालांकि केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया है कि:
-
वे अन्य अदालतों और मामलों में अपनी उपस्थिति जारी रखेंगे जहाँ उन्हें निष्पक्षता का भरोसा है।
-
इस मामले को लेकर वे भविष्य में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का विकल्प खुला रख रहे हैं।

More Stories
Saurabh Bharadwaj का बयान—“राज्यसभा सांसद बने इसलिए हुई शादी”, Raghav Chadha पर निशाना
Rajnath Singh-चीन रक्षा मंत्री की बिश्केक में मुलाकात, रिश्तों में नरमी के संकेत
बंगाल-तमिलनाडु में BJP की अग्निपरीक्षा, नए प्लान से जड़ें मजबूत करने की तैयारी