हैदराबाद: अविभाजित आंध्र प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़े 'तख्तापलट' के सूत्रधार माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री नादेंदला भास्कर राव का बुधवार को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन के साथ ही दक्षिण भारतीय राजनीति के एक बेहद चर्चित और विवादास्पद दौर का अंत हो गया है।
1984 का वह ऐतिहासिक 'तख्तापलट'
नादेंदला भास्कर राव का नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में साल 1984 के उस घटनाक्रम के लिए दर्ज है, जिसने पूरे देश को चौंका दिया था। उस समय उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.टी. रामा राव (NTR) के खिलाफ तब बगावत की थी, जब एनटीआर इलाज के लिए अमेरिका गए हुए थे।
भास्कर राव ने कांग्रेस के समर्थन से सत्ता हथिया ली और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, भारी जन आक्रोश और एनटीआर की वापसी के बाद हुए राजनीतिक दबाव के कारण उनकी सरकार मात्र एक महीने (लगभग 31 दिन) ही चल सकी।
सियासी सफर: कांग्रेस से टीडीपी और फिर कांग्रेस तक
भास्कर राव पेशे से वकील थे और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी।
वे टीडीपी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और एनटीआर की पहली सरकार में वित्त मंत्री भी रहे।
1984 की बगावत के बाद वे फिर से मुख्यधारा की राजनीति में आए और बाद में कांग्रेस में लौट गए।
1998 में वे खम्मम लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी चुने गए।
विवादित लेकिन निर्णायक नेतृत्व
नादेंदला भास्कर राव को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है जो संगठन कौशल में माहिर थे, लेकिन सत्ता संघर्ष की उनकी महत्वाकांक्षा ने उन्हें हमेशा विवादों के घेरे में रखा। उनके कार्यकाल को अक्सर 'लोकतंत्र की हत्या' और 'राज्यपाल की भूमिका पर विवाद' जैसे विषयों के संदर्भ में एक मिसाल के तौर पर देखा जाता है। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर उनकी पकड़ और राजनीतिक रणनीति का लोहा उनके विरोधी भी मानते थे।
राजनीतिक जगत में शोक
उनके निधन पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। श्रद्धांजलि देने वाले नेताओं का कहना है कि भास्कर राव एक अनुभवी राजनेता थे, जिन्होंने दशकों तक राज्य की राजनीति को प्रभावित किया। उनके समर्थकों ने उन्हें एक ऐसा नेता बताया जो अपने फैसलों पर अडिग रहता था।
"नादेंदला भास्कर राव का जाना तेलुगु राज्यों की राजनीति के एक पुराने स्तंभ का ढहना है। उनके फैसलों पर बहस हो सकती है, लेकिन उनकी राजनीतिक उपस्थिति को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।"
मुख्य तथ्य:
आयु : 90 वर्ष
मुख्यमंत्री कार्यकाल: 16 अगस्त 1984 – 16 सितंबर 1984
पहचान: एनटीआर के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह के लिए विख्यात।
उपलब्धि: पूर्व सांसद और अविभाजित आंध्र प्रदेश के दिग्गज नेता।

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