Garbage Tax: मध्य प्रदेश के बालाघाट में नगर पालिका ने एक नए तरह का टैक्स लागू करने की तैयारी में है. अब टैक्स कचरा संग्रहण के लिए लगाया जा रहा है. लेकिन दूसरी तरफ शहर में चारों तरफ गंदगी का अंबार रहता है. ऐसे में इस तरह के टैक्स से एक तरफ नगरपालिका को बढ़िया आय हो सकती है, तो दूसरी तरफ आम नागरिकों की जेब पर थोड़ा और भार बढ़ सकता है.
जानिए क्या है कचरा टैक्स
पहले नगरपालिका कचरा वाहनों से हर गली मोहल्ले में जाकर कचरा संग्रहण का काम करती है. पहले इस पर नगर वासियों ने शुल्क नहीं दिया. लेकिन अब उन्हें अपने जेब पर ढील देनी होगी. दरअसल, आवासीय घर से नगर पालिका 50 रुपए प्रतिमाह और वहीं, व्यवसायिक संस्थानों से 100 रुपए प्रतिमाह तय किया गया है.
जानिए क्यों लगाया गया टैक्स
सीएमओ बीडी कतरौलिया का कहना है कि “लोग अक्सर मुफ्त में मिलने वाली सेवाओं का महत्व नहीं समझते हैं.” सीएमओ के अनुसार, यह कोई नया नियम नहीं है बल्कि पूर्व से निर्धारित प्रावधान है जिसे अब लागू किया जा रहा है. उनका मानना है कि टैक्स लगने से व्यवस्था के प्रति लोगों की गंभीरता बढ़ेगी.
टैक्स से होगी तगड़ी कमाई
साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक बालाघाट नगरपालिका में कुल 18495 घर है. ऐसे में 15 साल में संख्या 30 हजार तक हो सकती है. ऐसे में घरों से 50 रुपए टैक्स वसूला जाए, तो 15 लाख रुपए तक टैक्स वसूल सकेगी. वहीं, दुकानों की संख्या भी काफी है. ऐसे में हर महीने लगभग 20 लाख रुपए नगरपालिका की कमाई हो सकती है.
हफ्ते में एक बार आती नपा की कचरा गाड़ी
स्थानीय लोगों का कहना है कि टैक्स को छोड़िए पहले सुविधाएं तो दिजीए. दरअसल, स्थानीय लोगों की शिकायत है कि वार्ड नंबर 33 और कई जगह पर सप्ताह में एक या दो बार ही कचरा गाड़ी आती है. ऐसे में लोग कचरा खुले में फेंक देते हैं. नगरपालिका को पहले अपनी व्यवस्था दूरस्त करनी चाहिए. उसी के बाद टैक्स वसूला जाना चाहिए. वार्डों के खाली प्लॉटों और नालियों में गंदगी पसरी रहती है. कई वार्डों में कचरा वाहन कई दिनों तक नहीं पहुंचते, जिससे स्वच्छता की हकीकत सामने आती है.
पार्षद ने जताया विरोध
नगरपालिका के पूर्व नेता प्रतिपक्ष योगराज कारो लिल्हारे का कहना है कि नगरपालिका ने पूर्व में भी ऐसा प्रस्ताव लाया था, जिसे मीटिंग में ही बर्खास्त कर दिया था. नगर पालिका के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है. उन्हें लगभग 40 और कचरा गाड़ियों की खरीदी की व्यवस्था करनी चाहिए. अगर व्यवस्था नहीं होने पर नगर पालिका के विपक्ष के पार्षद इस प्रस्ताव का विरोध करेंगे.

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